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यूपी : कानपुर IIT परिसर में पीएचडी छात्र ने छठी मंजिल से कूदकर की आत्महत्या

कानपुर, 20 जनवरी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में फिर एक छात्र की आत्महत्या का मामला सामने आया है। इस बार परिसर में स्थित बिल्डिंग की 6वीं मंजिल से कूदकर छात्र ने जान दे दी, जो अर्थ साइंस से पीएचडी कर रहा था। सूचना मिलते ही मैनेजमेंट ने छात्र को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जान देने वाले छात्र की पहचान ईश्वर राम के रूप में हुई है।

आईआईटी कानपुर के उप निदेशक प्रो. ब्रजभूषण ने इस संबंध में बताया कि छात्र शादीशुदा था। वह कैम्पस में पत्नी व बच्चों के साथ रहता था। घटना के बाद से पूरे आईआईटी परिवार दुःख में है।

पिछले 2 वर्षों में 8 छात्र कर चुके हैं सुसाइड

देखा जाए तो IIT कानपुर कैंपस में छात्रों के सुसाइड का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दो वर्षों में आठ छात्रों ने सुसाइड किया है। IIT प्रबंधन व प्रोफेसर्स कैंपस में बेहतर माहौल होने का दावा करते हैं। लेकिन सुसाइड के आंकड़े दावों की सच्चाई बताते हैं।

वर्ष 2025 में IIT कानपुर कैंपस के अंदर तीन छात्रों व एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने सुसाइड किया था। दिसम्बर, 2023 से जनवरी, 2024 तक तीन छात्रों ने आत्महत्या की थी। इन आत्महत्याओं के पीछे अन्य छात्र दबी जुबान में पढ़ाई का तनाव बताते हैं। IIT के काउंसलर्स का कहना है कि एवरेज स्टूडेंट्स का स्माल परसेंटेज है, वो कहीं न कहीं पढ़ाई के अतिरिक्त दबाव में आकर ही सुसाइड करने की ओर अपने कदम बढ़ा देते हैं।

छात्र अपनी बात बताएं, तभी तो हम कर पाएंगे समाधान

आईआईटी कानपुर में 20 वर्षों से अधिक समय से बतौर साइकेट्रिस्ट अपनी सेवाएं दे रहे डॉ. अलोक वाजपेई ने बताया, छात्रों के अंदर एक बड़ी कमी है, वो अपनी समस्याएं साझा नहीं करते। ज्यादातर छात्रों की परेशानियों में पढ़ाई ही शामिल होती है। IIT कानपुर में पढ़ाई का स्टैंडर्ड बहुत हाई है। अब जो स्टूडेंट एवरेज हैं, उन्हें प्रॉब्लम होगी, इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते। लेकिन ये पांच से 10 प्रतिशत छात्र ही होंगे। इसी तरह 100 में से 10 प्रतिशत छात्रों को मानसिक परेशानियां रहती हैं।

एवरेज और बिलो एवरेज स्टूडेंट्स के साथ हम बहुत अधिक मेहनत करते हैं – निदेशक प्रो. मणींद्र

वहीं आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा, ‘संस्थान में एवरेज और बिलो एवरेज स्टूडेंट्स के साथ हम बहुत अधिक मेहनत करते हैं। उन्हें जहां काउंसिलिंग सेल की सुविधा दी जाती है वहीं प्रोफेसर्स का पूरा सपोर्ट रहता है। इसके साथ ही अब छात्रों को सप्लिमेंट पेपर का भी विकल्प दिया जाने लगा है, जिसमें उन्हें बताया जाता है कि यदि वो पूरक परीक्षा पास कर लेंगे तो उन्हें पास माना जाएगा।’

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