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Padma Vibhushan Teejan Bai Death : पंडवानी की महान गायिका डॉ. तीजन बाई का निधन, 70 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Padma Vibhushan Teejan Bai Death : पंडवानी की महान गायिका डॉ. तीजन बाई का निधन, 70 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

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रायपुर, 5 जुलाई। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पंडवानी की महान गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं तीजन बाई ने शनिवार और रविवार की दरमियानी रात करीब 3:15 बजे रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में अंतिम सांस ली। उनके निधन से देशभर के कला जगत और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में शोक की लहर दौड़ गई है।

13 साल की उम्र में शुरू हुआ था पंडवानी का सफर

दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई को बचपन से ही अपने नाना से महाभारत की कथाएं सुनने का अवसर मिला। यही कथाएं आगे चलकर उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बनीं। सामाजिक रूढ़ियों और परंपरागत सीमाओं को चुनौती देते हुए उन्होंने बेहद कम उम्र में पंडवानी गायन को अपना जीवन बना लिया। महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी और अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय तथा अनूठी प्रस्तुति शैली से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उनकी प्रस्तुति में हाथ का तंबूरा कभी अर्जुन का गांडीव, कभी भीम की गदा और कभी युद्ध के अन्य प्रतीकों का रूप ले लेता था। महाभारत के पात्र उनकी आवाज और अभिनय के जरिए मानो मंच पर जीवंत हो उठते थे।

देश-दुनिया में मिली पहचान

डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी जैसी पारंपरिक लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनकी कला और योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें कई प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया, जिनमें शामिल हैं-

  • पद्मश्री
  • पद्म भूषण
  • पद्म विभूषण (देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान)

इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी जताई थी चिंता

डॉ. तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार चिंता व्यक्त करते रहे थे। वर्ष 2025 में उन्होंने स्वयं फोन कर उनकी बहू वेणू देशमुख से तीजन बाई के स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान कहा था कि तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का आश्वासन देते हुए आवश्यकता पड़ने पर सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से संपर्क करने की बात भी कही थी।

लोक कला के स्वर्णिम युग का अंत

डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोक संस्कृति के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने पंडवानी को गांवों की चौपाल से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उनकी दमदार आवाज, सशक्त अभिनय और जीवंत प्रस्तुति शैली आने वाली पीढ़ियों के लोक कलाकारों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनके जाने से भले ही लोककला जगत ने एक महान कलाकार खो दिया हो, लेकिन उनकी पंडवानी की गूंज भारतीय संस्कृति के इतिहास में सदैव अमर रहेगी।

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