संसद मॉनसून सत्र : आज होगी एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक, बचे 10 दिनों की रणनीति पर होगा मंथन
नई दिल्ली, 4 जुलाई। संसद के मॉनसून सत्र के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) मंगलवार को संसद पुस्तकालय भवन (पीएलबी) स्थित जी.एम.सी. बालयोगी ऑडिटोरियम में अपनी साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित करेगा। सुबह 9:30 बजे शुरू होने वाली इस बैठक में मॉनसून सत्र के बचे हुए 10 दिनों के लिए सदन की रणनीति तय की जाएगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संसदीय कार्यालय की ओर से लोकसभा और राज्यसभा के सभी एनडीए सांसदों को बैठक में समय पर उपस्थित रहने के लिए नोट जारी किया गया है।
पीएम मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्री रहेंगे मौजूद
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सहित एनडीए के सभी प्रमुख सांसदों के शामिल होने की संभावना है। बैठक में संसद के दोनों सदनों में सरकार की रणनीति, प्रमुख विधेयकों, विपक्ष के मुद्दों का जवाब और सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा होगी।
क्या है ‘मंगल मिलन’ बैठक का उद्देश्य?
‘मंगल मिलन’ एनडीए संसदीय दल के साप्ताहिक रणनीति सत्र का नया स्वरूप है। इसका उद्देश्य सहयोगी दलों के बीच संवाद बढ़ाना, संसद में समन्वित रणनीति तैयार करना और सदन के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करना है। इस मंच के जरिए विभिन्न दलों के सांसदों को संसद में अलग-अलग विषयों पर बोलने की जिम्मेदारियां भी तय की जाती हैं, ताकि गठबंधन की ओर से प्रभावी और समन्वित तरीके से पक्ष रखा जा सके।
सहयोगी दलों के बीच बढ़ रहा समन्वय
एनडीए की इस बैठक में शिवसेना, लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी), तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), जनता दल (यूनाइटेड) [जेडीयू] समेत अन्य सहयोगी दलों के सांसद भी हिस्सा लेंगे। बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य गठबंधन के सभी दलों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना और संसद में साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ना है।
पिछली बैठक भी रही थी चर्चा में
28 जुलाई को आयोजित पिछली ‘मंगल मिलन’ बैठक कई कारणों से चर्चा में रही थी। उस बैठक में नेशनल नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) की सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायोनी घोष पहली बार शामिल हुई थीं। ये तीनों पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी थीं। बैठक में शामिल एनसीपीआई के कई सांसदों ने एनडीए के संसदीय कामकाज की शैली और समन्वित कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए इसे “व्यवस्थित और प्रभावी” बताया था।
