सहारनपुर, 5 सितम्बर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक मस्जिद शनिवार सुबह गिरा दी गई। जिला जज की अदालत ने इस ढांचे को अवैध घोषित करने वाले आदेश को बरकरार रखा था, जिसके कुछ दिनों बाद यह काररवाई की गई। अधिकारियों ने बताया कि काररवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) समेत भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया।
रात में ही कलेक्ट्रेट परिसर में जेसीबी मशीनें, डंपर और तोड़ने-फोड़ने के दूसरे उपकरण लाए गए थे। प्रशासन ने शनिवार सुबह-सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद के ढांचे को हटाने का काम शुरू किया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे।
सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने पाया था कि यह ढांचा सरकारी ज़मीन पर गैर-कानूनी तरीके से बनाया गया था। मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी गई, जिससे इसे गिराने का रास्ता साफ हो गया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए गए थे।
इस काररवाई से पहले पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। सभी पांच एंट्री गेट सील कर दिए गए थे और किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर आने की इजाज़त नहीं थी। आसपास के इलाकों में भी पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई थी और दूसरे ज़िलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था।

कैराना की सांसद इकरा हसन नज़रबंद
इस बीच कैराना की सांसद इकरा हसन को उनके घर पर ही नजरबंद कर दिया गया, जब वह तोड़-फोड़ के मामले में सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। कैराना लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली 32 वर्षीय हसन ने बताया कि जब वह सहारनपुर जाने के लिए निकल रही थीं, तो उनके घर पर भारी पुलिस बल पहुंच गया। उन्होंने कहा कि वह तोड़-फोड़ के मामले में अधिकारियों से मिलना चाहती थीं और इलाके के लोगों की चिंताएं उनके सामने रखना चाहती थीं।
इकरा हसन ने कहा, ‘कल रात मुझे सहारनपुर जाने से रोकने के लिए मेरे कैराना स्थित घर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और मुझे नज़रबंद कर दिया गया।’ खास बात यह है कि सहारनपुर जिला कैराना लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसका प्रतिनिधित्व हसन करती हैं।
कैराना सांसद ने इस काररवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से जुड़े मुद्दों पर सरकारी अधिकारियों से मिलना किसी चुने हुए प्रतिनिधि के लिए अपराध हो गया है। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में, जन प्रतिनिधियों को लोगों की आवाज उठाने के लिए चुना जाता है। मुझे रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता।’


