Mekedatu Dam : कर्नाटक की मेकेदातु परियोजना के खिलाफ डीएमके का संसद में स्थगन प्रस्ताव, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
चेन्नई, 19 जुलाई। कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) ने इस परियोजना के विरोध को संसद तक पहुंचाते हुए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) दाखिल किया है। पार्टी ने इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
डीएमके का कहना है कि मेकेदातु परियोजना तमिलनाडु की जल सुरक्षा, कावेरी नदी के जल बंटवारे और लाखों किसानों की आजीविका पर गंभीर असर डाल सकती है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है और पार्टी चाहती है कि इस मुद्दे को सार्वजनिक महत्व का विषय मानते हुए प्राथमिकता से सदन में उठाया जाए।
टीआर बालू ने लोकसभा में उठाया मुद्दा
लोकसभा में डीएमके संसदीय दल के नेता टीआर बालू ने स्पीकर को दिए नोटिस में कहा कि कर्नाटक की ओर से मेकेदातु में संतुलन जलाशय (Balancing Reservoir) बनाने की योजना का तमिलनाडु पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उनके अनुसार, यदि यह परियोजना आगे बढ़ती है तो कावेरी नदी के जल प्रवाह में कमी आ सकती है, जिससे विशेष रूप से कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने सदन से आग्रह किया कि अन्य कार्यवाही स्थगित कर इस मुद्दे पर तत्काल विस्तृत चर्चा कराई जाए।
राज्यसभा में भी डीएमके ने दिया नोटिस
राज्यसभा में डीएमके के फ्लोर लीडर तिरुचि शिवा ने भी इसी मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि मेकेदातु परियोजना के कानूनी, पर्यावरणीय और कृषि संबंधी प्रभाव बेहद गंभीर हैं और इस पर संसद में तत्काल चर्चा होनी चाहिए।
केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग
डीएमके लगातार यह मांग करती रही है कि तमिलनाडु सहित निचले तटीय राज्यों की सहमति के बिना मेकेदातु परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। पार्टी ने केंद्र सरकार से कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले और जल बंटवारे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की भी अपील की है।
संसद में गरमा सकता है मुद्दा
लोकसभा और राज्यसभा में दाखिल दोनों स्थगन प्रस्तावों से साफ है कि डीएमके मानसून सत्र के दौरान मेकेदातु परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी केंद्र सरकार पर दबाव बनाएगी कि सभी अंतरराज्यीय विवादों का समाधान होने तक कर्नाटक को इस परियोजना पर आगे बढ़ने से रोका जाए।
