280 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, बंगाल में 12 ठिकानों पर छापेमारी; 64 करोड़ की संपत्तियां फ्रीज

कोलकाता, 8 सितंबर : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 280 करोड़ रुपये से अधिक की कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पश्चिम बंगाल में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी के कोलकाता जोनल कार्यालय ने कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत विभिन्न स्थानों पर 12 ठिकानों की तलाशी ली।

ED ने सोमवार को जारी बयान में बताया कि यह जांच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) की ओर से कोलकाता की दूसरी विशेष अदालत में दायर शिकायत के आधार पर शुरू की गई। मामला कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े व्यक्तियों की कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है।

MCA के आदेश पर शुरू हुई थी कंपनी की जांच

जानकारी के मुताबिक, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) ने कंपनी के मामलों की जांच के आदेश दिए थे। यह कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) ने मंत्रालय को ऐसी कंपनियों की सूची भेजी थी, जिनके खिलाफ रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में संदिग्ध लेनदेन को लेकर आवेदन दायर किए थे।

ED के अनुसार, जांच में सामने आया कि कंपनी और उसके निदेशकों ने कथित तौर पर गलत जानकारी दी, महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया, खातों में हेरफेर किया और ऋण की रकम को दूसरी जगह ट्रांसफर किया। एजेंसी का आरोप है कि इन तरीकों के जरिए बैंकों के समूह को गुमराह कर वित्तीय सुविधाएं हासिल की गईं।

बैंकों को 97.5 फीसदी नुकसान का दावा

जांच एजेंसी के मुताबिक, बाद में कंपनी दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत परिसमापन प्रक्रिया में चली गई। इस प्रक्रिया के दौरान बैंकों को करीब 7 करोड़ रुपये ही वापस मिल सके। ED के अनुसार, इससे बैंकों को लगभग 97.5 फीसदी का नुकसान हुआ।

कथित अपराध की रकम से खरीदी गईं संपत्तियां

ED ने बताया कि जांच के दौरान कोलकाता और आसपास के इलाकों में कई अचल संपत्तियों का पता चला है। एजेंसी का दावा है कि इन संपत्तियों को कथित अपराध से अर्जित धन से खरीदा गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि इन संपत्तियों से कंपनी के प्रमोटरों को कथित तौर पर हर महीने करीब 26 लाख रुपये की किराये की आय प्राप्त हो रही थी।

100 से अधिक शेल कंपनियों के इस्तेमाल का आरोप

ED के मुताबिक, कंपनी के प्रमोटर विजय बोथरा और प्रशांत बोथरा कथित तौर पर 100 से अधिक शेल कंपनियों को नियंत्रित कर रहे थे। एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल बैंक धोखाधड़ी से हासिल धन को अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर करने और उसे वैध दिखाने के लिए किया गया।

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि बड़ी मात्रा में धनराशि रिश्तेदारों और कथित डमी निदेशकों के नाम पर विदेशों में निवेश की गई।

64 करोड़ रुपये की वित्तीय संपत्तियां फ्रीज

तलाशी अभियान के दौरान ED ने 150 से अधिक शेल कंपनियों और व्यक्तियों से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज किया है। इसके अलावा शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय निवेशों पर भी रोक लगाई गई है। एजेंसी के अनुसार, फ्रीज की गई बैंक जमा राशि और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों का कुल मूल्य करीब 64 करोड़ रुपये है।

डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय दस्तावेज बरामद

तलाशी के दौरान ED ने डिजिटल साक्ष्य, कंपनी से जुड़े रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और संपत्तियों से संबंधित कागजात बरामद किए हैं। एजेंसी इन दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। इसका उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित धन और उससे खरीदी गई अन्य संपत्तियों का पता लगाना है।

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