नोएडा पुलिस का बड़ा एक्शन: फर्जी कंपनियों के बैंक खाते साइबर ठगों को बेचने वाले 7 आरोपी गिरफ्तार

नोएडा, 31 जुलाई।  साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नोएडा पुलिस ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगों को बेचता था। इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पर लोगों से ठगी कर वसूली गई रकम को ट्रांसफर करने में किया जाता था। थाना फेस-3 पुलिस ने 29 जुलाई को बीट पुलिसिंग और गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए अजब सिंह, प्रदीप, गुलाब सिंह लोधी, कौशल, सचिन, जिनेन्द्र सिंह और प्रियंका को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक चेक बुक, एक स्टैम्प और चार लेटर हेड बरामद किए हैं।

WhatsApp और Telegram के जरिए होता था नेटवर्क ऑपरेट

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाने के बाद व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से साइबर अपराधियों से जुड़े रहते थे। बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की सिम अपने पास रखकर मोबाइल में ‘डिंग एसएमएस’ नाम की एपीके फाइल इंस्टॉल करते थे। इसी ऐप के जरिए बैंक खातों से जुड़े ओटीपी और एसएमएस उनके मोबाइल पर पहुंचते थे, जिससे साइबर ठग खातों में आई रकम को आसानी से संचालित कर लेते थे।

74 साइबर शिकायतों से खुला बड़े नेटवर्क का राज

जांच के दौरान इन बैंक खातों में लाखों रुपये के लेनदेन का पता चला है। पुलिस के अनुसार, इन खातों के खिलाफ देशभर में साइबर ठगी से जुड़ी 74 शिकायतें दर्ज हैं। इससे गिरोह के बड़े नेटवर्क और कई राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से संबंध होने की आशंका जताई जा रही है।

ठगी की रकम में मिलता था कमीशन

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को बेच देते थे। बदले में उन्हें ठगी गई रकम का तय प्रतिशत कमीशन के रूप में मिलता था, जिसे सभी आरोपी आपस में बांट लेते थे। गिरफ्तार आरोपियों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और आगरा के निवासी शामिल हैं।

आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज, जांच जारी

नोएडा पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और किन-किन राज्यों के साइबर अपराधियों से इनके संबंध थे।

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