काशी की पंचकोशी यात्रा: देवाधिदेव की नगरी का एक अद्भुत अनुभव

[अलकेश पटेल] 24 अगस्त, 2026: काशी अर्थात बनारस अर्थात वाराणसी नाम आते ही हर सनातनी को देवाधिदेव शिवजी का स्मरण हो जाता है। काशी विश्वनाथ के दर्शन याद आते हैं, काशी के भव्य घाट याद आते हैं। लेकिन इन सबके बीच शायद बहुत कम लोगों को काशी की पंचकोशी यात्रा के बारे में जानकारी होगी। लाखों-करोड़ों हिंदू काशी की यात्रा पर गए होंगे, लेकिन संभव है कि उन सभी को पंचकोशी यात्रा के बारे में जानकारी न हो। तो आज इसके बारे में थोड़ी प्रारंभिक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

क्या है पंचकोशी यात्रा

स्थानीय स्तर पर ‘पंचक्रोशी यात्रा’ के रूप में भी लोकप्रिय यह पंचकोशी यात्रा वास्तव में सनातन के सभी देवी-देवताओं के दर्शन करने की यात्रा है। ‘कोश’, ‘गाँव’ (कोस) जैसे शब्दों से जो परिचित हैं, उनके लिए पंचकोशी (या पंचक्रोशी) शब्द को समझना कठिन नहीं है। पंचकोशी अर्थात पाँच कोश अर्थात 11 मील अर्थात 17.6 किलोमीटर।

मूल बात यह है कि काशी के इतने क्षेत्र में अर्थात पंचकोशी क्षेत्र में कुल 108 मंदिर हैं जहाँ पैदल चलकर दर्शन करने होते हैं। हालाँकि, स्थानीय गाइड श्री रवि त्रिपाठी का कहना है कि सदियाँ बीत जाने के कारण अब कुछ मंदिरों के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है। सामान्य परिस्थितियों में यह यात्रा पाँच दिनों की होती है। कुछ लोग इसे तीन दिनों में पूरा करते हैं और समय तथा शारीरिक क्षमता के अभाव में संपूर्ण यात्रा मार्ग के मुख्य मंदिरों में दर्शन करके यात्रा एक दिन में भी की जा सकती है।

Kashi's Panchkoshi Yatra: A remarkable experience in the city of the Lord of Lords. pics by Alkesh Patel

पंचकोशी यात्रा का महत्त्व

पंचकोशी यात्रा श्रद्धालुओं के लिए इस शहर के आराध्य देव भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक मार्ग है। यह यात्रा वाराणसी के सबसे पवित्र घाटों में से एक मणिकर्णिका घाट से शुरू होती है और कर्दमेश्वर मंदिर, रामेश्वर मंदिर और शिवपुर मंदिर सहित कई महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों को कवर करती है। पंचकोशी यात्रा न केवल एक शारीरिक यात्रा है, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा भी है, जहाँ श्रद्धालु दिव्यता से जुड़ सकते हैं और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। इस यात्रा को जीवन में एक ही बार मिलने वाला अनुभव माना जाता है, और कई श्रद्धालु अतीत की गलतियों के लिए क्षमा माँगने, मनोकामनाएँ पूरी करने या केवल ईश्वर के प्रति भक्ति व्यक्त करने के माध्यम के रूप में यह यात्रा करते हैं। वाराणसी शहर, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के साथ, इस पवित्र यात्रा के लिए एक उत्कृष्ट पृष्ठभूमि प्रदान करता है। अपनी संकरी गलियों, चहल-पहल भरे बाजारों और भव्य मंदिरों के साथ, वाराणसी एक ऐसा शहर है जो परंपरा और आध्यात्मिकता में पूरी तरह से रंगा हुआ है।

Kashi's Panchkoshi Yatra: A remarkable experience in the city of the Lord of Lords. pics by Alkesh Patel
Kashi’s Panchkoshi Yatra: A remarkable experience in the city of the Lord of Lords.

व्यक्तिगत अनुभूति

हाल ही में SMaRT अर्थात Samachar Manyata Association for Research and Training द्वारा आयोजित काशी पंचकोशी यात्रा ने एक प्रकार से अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति कराई। संस्था के स्थानीय सहयोगी श्री अर्जुन पांडे, प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालुओं को यह यात्रा कराने वाले काशी के स्थानीय अनुभवी मार्गदर्शकों श्री रवि त्रिपाठी और अनुराग मौर्य की टीम ने हमें यह यात्रा कराकर जीवन का एक स्मरणीय अनुभव प्रदान किया। इस यात्रा में मुझे सर्वश्री हर्षवर्धन त्रिपाठी (सुप्रसिद्ध पत्रकार और टीवी पैनलिस्ट), शांतनु गुप्ता (टीवी पैनलिस्ट और श्री योगी आदित्यनाथ की जीवनी के लेखक), संदीप सिंह (टेम्पल इकोनॉमिक्स (दो वॉल्यूम) के लेखक और विभिन्न आईआईएम संस्थानों के विजिटिंग फैकल्टी), मृत्युंजय शर्मा (लेखक और उद्योगपति), मंदार घोटकर (उद्यमी और संघ के स्वयंसेवक), अनादिरंजन बिस्वास (पत्रकार, अंडमान-निकोबार और पश्चिम बंगाल) तथा तमिलनाडु में मंदिरों की रक्षा के लिए अकेले दम पर आंदोलन चलाने वाले रंगराजन नरसिम्हन जैसे दिग्गजों के साथ जुड़ने का अवसर मिला।

उमाशंकर गुप्ता का उल्लेखनीय योगदान

पंचकोशी यात्रा के दौरान एक गणेश मंदिर के पास एक फोटो लगा हुआ था जिसमें काशी स्थित 56 विनायक मंदिरों के बारे में जानकारी थी। पूछताछ करने पर पता चला कि इस पावन नगरी के एक बुजुर्ग उमाशंकर गुप्ता जी भी कई दशकों से लोगों को पंचकोशी यात्रा करा रहे हैं, वह तो ठीक है, लेकिन उनका मुख्य योगदान यह है कि उन्होंने काशी के 56 प्राचीन गणेश मंदिरों का दस्तावेजीकरण किया है।

Kashi's Panchkoshi Yatra: A remarkable experience in the city of the Lord of Lords. pics by Alkesh Patel

जब श्री उमाशंकर जी से प्रत्यक्ष मुलाकात हुई तो उन्होंने बताया कि जब काशी प्रशासन पूरी पंचकोशी यात्रा का दस्तावेजीकरण कर रहा था, तब प्रशासन के पास गणेश जी के सभी प्राचीन मंदिरों की जानकारी नहीं थी। वह जानकारी उन्होंने उपलब्ध कराई, जिसके लिए प्रशासन द्वारा उमाशंकर जी का सम्मान भी किया गया था।

काशी और पंचकोशी यात्रा के बारे में एक-आध रिपोर्ट पर्याप्त नहीं है। यहाँ के एक-एक मंदिर से कई प्राचीन कथाएँ जुड़ी हुई हैं। यात्रा करने और काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए रोजाना हजारों लोग यहाँ पहुँचते हैं, ऐसा कहने में जरा भी अतिशयोक्ति नहीं है। स्वाभाविक रूप से यहाँ आने वाले सभी लोग महँगी होटलों में रहने का खर्च नहीं उठा सकते, इसलिए शहर के प्रशासन द्वारा कई स्थानों पर विशाल धर्मशालाएँ तैयार की गई हैं जहाँ श्रद्धालु ठहर सकते हैं। श्रद्धालु स्वयं भोजन बना सकें, ऐसी व्यवस्था भी इन धर्मशालाओं में देखने को मिलती है।

काशी विद्वत परिषद और संस्कृत पाठशालाओं के लिए भी प्रसिद्ध यह वाराणसी शहर एक ऐसा स्थान है, एक ऐसा तीर्थधाम है जहाँ शायद इसके गहरे सनातन संस्कारों के कारण भयमुक्त और चिंतामुक्त वातावरण का सहज अनुभव किया जा सकता है।

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