जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट : टैक्स सुधार व नीतिगत समर्थन के चलते भारतीय शेयर बाजार में बड़ी मात्रा में आ रही घरेलू पूंजी

नई दिल्ली, 28 जून। हाल के वर्षों में लागू किए गए टैक्स सुधार और कई नीतिगत उपायों ने भारत में इक्विटी निवेश को और आकर्षक बना दिया है। इससे पिछले दो वर्षों में रिटर्न अपेक्षाकृत कम रहने के बावजूद शेयर बाजार में घरेलू निवेश का प्रवाह लगातार बना रहने के लिए अनुकूल स्थितियां तैयार हुई हैं। यह जानकारी जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट में दी गई।

वैश्विक निवेश बैंक ने कहा कि लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स, डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर टैक्स से जुड़े हालिया बदलावों ने इक्विटी को और अधिक आकर्षक बना दिया है, जिससे भारतीय परिवारों की बचत का वित्तीय संपत्तियों की ओर झुकाव और बढ़ा है।

जेपी मॉर्गन ने बताया कि इक्विटी पर अभी 12.5 प्रतिशत ​​लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है जबकि इंडेक्सेशन बेनिफिट्स को हटाने, कुछ इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाली रकम पर टैक्स और डेट म्यूचुअल फंड के लिए स्लैब-रेट टैक्स जैसे पॉलिसी बदलावों ने इक्विटी निवेश के पक्ष में समीकरण को बदल दिया है।

वैश्विक निवेश बैंक का कहना है कि टैक्स और रेगुलेटरी नियमों में बदलाव के साथ-साथ सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए बढ़ती भागीदारी से इक्विटी मार्केट में घरेलू पैसे का लगातार प्रवाह बने रहने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 और 2026 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में अपना निवेश कम किया, फिर भी घरेलू निवेशक डटे रहे। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स से भले ही मामूली रिटर्न मिला, लेकिन रिटेल निवेशकों ने एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखा। इससे पता चलता है कि यह निवेश के तौर-तरीकों में आया एक बुनियादी बदलाव है, न कि बाजार में थोड़े समय के उतार-चढ़ाव पर दी गई कोई प्रतिक्रिया।

घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी भारतीय इक्विटी की अहम ताकत

जेपी मॉर्गन ने कहा कि घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी भारतीय इक्विटी के लिए स्थिरता लाने वाली एक अहम ताकत बनकर उभरी है। इससे विदेशी फंड की निकासी और ग्लोबल स्तर पर जोखिम से बचने के दौर में आने वाले उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद मिली है।

भारत के आईटी सेक्टर में लंबे समय तक रह सकती है नरमी

इसके अलावा वैश्विक निवेश बैंक ने भारत के आईटी सेक्टर को लेकर सावधानी भरा रुख अपनाया है। उसका कहना है कि इस इंडस्ट्री को लंबे समय तक धीमी ग्रोथ का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से आए बदलाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर मांग पर पड़ रहा है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि टेक्नोलॉजी और बिजनेस साइकिल से जुड़ी चुनौतियों के अभूतपूर्व मेल के कारण इस सेक्टर में डिमांड को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

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