हांगझू, 27 जुलाई। भारत की उदीयमान निशानेबाज ईशा सिंह ने सोमवार को यहां आईएसएसएफ विश्व कप (राइफल/पिस्तौल/शॉटगन) में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में ओलम्पिक पदक विजेता हमवतन मनु भाकर को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता। हालांकि भाकर भी शूट-ऑफ में कांस्य पदक जीतने में सफल रही। इस प्रकार भारत ने स्पर्धा में दो पदक हासिल किए।
21 वर्षीय ईशा ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए 40 अंक बनाकर स्वर्ण पदक पर अधिकार किया जबकि पेरिस ओलम्पिक 2024 में दो कांस्य पदक जीतने वालीं मनु ने कुल 28 अंक बनाए और शूट-ऑफ जीतकर कांस्य पदक हासिल किया।
भारतीय शूटरों ने क्वालीफाइंग दौर से ही अच्छी शुरुआत की
दरअसल, भारतीय शूटरों ने क्वालीफाइंग दौर से ही अच्छी शुरुआत की और पदक तक पहुचीं। मनु ने 586 अंक बनाकर क्वालीफाइंग में पहला स्थान हासिल किया जबकि ईशा 585 अंक लेकर दूसरे स्थान पर रही। इस तरह से इन दोनों ने आठ निशानेबाजों के फाइनल में आसानी से जगह बनाई।
Bharat on the podium! 🥇🥉
Congratulations to Esha Singh and Manu Bhaker on winning Gold and Bronze in the Women’s 25m Pistol event at the ISSF World Cup in Hangzhou.
The entire nation is proud of you both! pic.twitter.com/51y7nEgAIJ
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) July 27, 2026
एशियाई खेलों की पूर्व स्वर्ण पदक विजेता राही सरनोबत ने 582 का स्कोर बनाया जबकि सिमरनप्रीत कौर बराड़ (576) और अभिदन्या अशोक पाटिल (573) ने केवल रैंकिंग अंकों के लिए (आरपीओ) खेलते हुए अच्छा प्रदर्शन किया।
पिछली जीत के कारण मुझ पर काफी दबाव था – ईशा
इस सत्र की शुरुआत में म्यूनिख विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली ईशा ने कहा, ‘पिछली जीत के कारण मुझ पर काफी दबाव था। जब आप अपनी स्पर्धा में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो आपसे काफी उम्मीद की जाती है। मुझे खुशी है कि आज मैं इस दबाव को झेलने में सफल रही।’
ईशा ने म्यूनिख विश्व कप के फाइनल में बनाया था विश्व रिकॉर्ड
ईशा ने इस सत्र के शुरू में म्यूनिख विश्व कप के फाइनल में 43 अंक बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इस तरह से उन्होंने अपनी निरंतरता बनाए रखी है, जो एशियाई खेल सहित आगामी प्रतियोगिताओं की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
भाकर बोलीं – ‘इस पदक से निश्चित रूप से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा’
दूसरी तरफ मनु ने कहा कि इस पदक से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए यह पदक बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस तरह की सफलता सीढ़ी का काम करती है। इससे मुझे यह पता चलता है कि मैं किस दिशा में आगे बढ़ रही हूं। इस पदक से निश्चित रूप से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है और इसका मुझे विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में फायदा मिलेगा।’

