ED Raid: TMC सांसद नदीमुल हक से जुड़े ठिकानों पर ED की छापेमारी, दिल्ली-रांची-कोलकाता में 7 जगह कार्रवाई

नई दिल्ली, 7 सितंबर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद नदीमुल हक से जुड़े कई ठिकानों पर सोमवार को छापेमारी की। ईडी सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी ने दिल्ली, रांची और कोलकाता में सात अलग-अलग स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।

यह कार्रवाई कथित तौर पर ऐसी सामग्री के प्रकाशन और प्रसार से जुड़े मामले की जांच के तहत की गई है, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित होने का आरोप है। जांच में कथित अवैध लेन-देन, बिना हिसाब-किताब के नकद लेन-देन और संदिग्ध स्रोतों से फंडिंग के पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

विधाननगर पुलिस की FIR के आधार पर जांच

ईडी ने विधाननगर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से दर्ज FIR के आधार पर इस मामले में ECIR दर्ज की थी। इसी ECIR के तहत एजेंसी ने सोमवार को कई स्थानों पर तलाशी ली। ईडी के सूत्रों के मुताबिक, जांच का उद्देश्य कथित वित्तीय लेन-देन और फंडिंग से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का पता लगाना है।

पश्चिम बंगाल में ED की कार्रवाई तेज

मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अलग-अलग मामलों की जांच के सिलसिले में ईडी हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में सक्रिय रही है। इससे पहले रविवार सुबह ईडी की एक टीम ने उत्तरी कोलकाता में शेयर ट्रेडिंग और मनी मार्केट से जुड़े एक कारोबारी परिवार के आवास पर तलाशी अभियान शुरू किया था। इस कार्रवाई में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों की जगह ईडी टीम के साथ कोलकाता पुलिस के जवान मौजूद रहे।

फूलबागान थाने पहुंची थी ED की टीम

जानकारी के मुताबिक, ईडी के पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी सबसे पहले फूलबागान पुलिस स्टेशन पहुंचे। जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ईडी अधिकारियों और स्थानीय पुलिस की टीम कांकुरगाछी स्थित ‘शिवम’ भवन पहुंची और वहां तलाशी अभियान चलाया।

290 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड मामले में भी कार्रवाई

इससे पहले 3 सितंबर को ईडी ने कोलकाता में कई स्थानों पर तलाशी ली थी। यह कार्रवाई एक निजी कंपनी से कथित तौर पर जुड़े 290 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड और उससे संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई थी। जांच के अनुसार, संबंधित कंपनी ने झारखंड में 66 मेगावाट क्षमता का पावर प्लांट स्थापित करने के लिए बैंकों से कर्ज लिया था। आरोप है कि लोन की रकम को समूह की अन्य कंपनियों और निजी इस्तेमाल के लिए कथित तौर पर डायवर्ट किया गया। ईडी अब इन मामलों में वित्तीय लेन-देन, फंडिंग के स्रोत और कथित मनी ट्रेल की जांच कर रही है।

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