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मिडिल ईस्ट संकट के चलते 3 दिन से बंद है दुबई एयरपोर्ट, 3,000 से अधिक फ्लाइट रद्द, जहां-तहां फंसे हैं लोग

मिडिल ईस्ट संकट के चलते 3 दिन से बंद है दुबई एयरपोर्ट, 3,000 से अधिक फ्लाइट रद्द, जहां-तहां फंसे हैं लोग

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नई दिल्ली, 2 मार्च। दुनिया भर में हवाई यात्रा एक बार फिर बड़े संकट से गुजर रही है। सोमवार को भी सैकड़ों अतिरिक्त उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिससे वैश्विक हवाई यातायात में उथल-पुथल मची हुई है। अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद पैदा हुए हालात ने लाखों यात्रियों को प्रभावित किया है और हजारों लोग अलग-अलग देशों के एयरपोर्ट्स पर फंसे हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह तक 1,239 उड़ानें पहले ही रद्द हो चुकी थीं। इससे पहले शनिवार को लगभग 2,800 और रविवार को 3,156 उड़ानें रद्द की गई थीं। ये आंकड़े फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म फ्लाइट अवेयर ने जारी किए।

वहीं फ्लाइट रेडार 24 के अनुसार सोमवार तक ईरान, इराक, कुवैत, इज़राइल, बहरीन, यूएई और कतर के ऊपर का हवाई क्षेत्र लगभग खाली नजर आ रहा था। सबसे बड़ा झटका मध्य पूर्व के प्रमुख हवाई अड्डों को लगा है। दुबई, जो दुनिया का सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हब माना जाता है, तीसरे दिन भी बंद रहा। अबू धाबी और दोहा के एयरपोर्ट भी या तो पूरी तरह बंद रहे या बेहद सीमित सेवाओं के साथ संचालित हुए। कोविड-19 महामारी के बाद यह विमानन उद्योग के लिए सबसे बड़ा झटका बताया जा रहा है।

एयरलाइंस कंपनियों पर भी जबरदस्त दबाव देखा गया। एमिरेट्स ने सोमवार दोपहर 3 बजे (यूएई समय) तक दुबई से आने-जाने वाली सभी निर्धारित उड़ानें निलंबित कर दीं। एतिहाद एयरवेज ने अबू धाबी के लिए दोपहर 2 बजे तक सभी सेवाएं रोक दीं। कतर एयरवेज ने कतर के हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण उड़ान संचालन ही स्थगित कर दिया। इन तीनों एयरलाइंस ने मिलकर सैकड़ों उड़ानें रद्द कीं। संकट का असर भारत पर भी पड़ा। एयर इंडिया ने रविवार को दिल्ली, मुंबई और अमृतसर से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानें रद्द कर दीं। यूरोप से लेकर एशिया तक कनेक्टिंग फ्लाइट्स बाधित होने से बाली से फ्रैंकफर्ट तक यात्री फंसे हुए हैं। रविवार को दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से उड़ान भरने वाली 100 फ्लाइट्स रद्द की गईं।

दोनों पक्षों की ओर से आ रहे बयान खास उत्साहवर्धक नहीं हैं। ताबड़तोड़ हमले हो रहे हैं। ईरान खाड़ी देशों में स्थित यूएस बेस को भी निशाना बना रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि अनिश्चितता जितनी लंबी चलेगी, विमानन उद्योग को उतना अधिक वित्तीय नुकसान होगा। जैसे-जैसे संघर्ष लेबनान तक फैला और बेरूत के दक्षिणी इलाकों में हवाई हमले हुए, क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बंद हवाई क्षेत्र में तब्दील हो गया। पायलट और क्रू अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं, जिससे हवाई क्षेत्र खुलने के बाद भी सेवाएं तुरंत बहाल करना चुनौतीपूर्ण होगा। कुल मिलाकर, यह संकट सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहा। भू-राजनीतिक टकराव, बंद हवाई क्षेत्र और बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक हवाई यात्रा को फिर से अस्थिर बना दिया है।

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