कर्नाटक : डीके शिवकुमार ने ली सीएम पद की शपथ, जी परमेश्वर डिप्टी सीएम, 13 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली

बेंगलुरु, 3 जून। कांग्रेस विधायक दल के नेता डी.के. शिवकुमार ने बुधवार कर्नाटक के 24वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने लोक भवन के ‘ग्लास हाउस’ में आयोजित एक भव्य समारोह में शिवकुमार को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई।

वहीं कर्नाटक कांग्रेस के बड़े दलित नेता जी परमेश्वर ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही डीके के 13 और मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें के.एच. मुनियप्पा, के.जे. जॉर्ज, एम.बी. पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायर गौड़ा, प्रियांक खरगे, यू.टी. खादर, ईश्वर खंड्रे, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्दारमैया, बैरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल शामिल हैं।

संविधान की प्रति लेकर ली शपथ

गौर करने वाली बात यह रही कि राज्यपाल गहलोत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शिवकुमार को बुलाया तो डीके के हाथ में लाल रंग की संविधान की प्रति भी थी। इसी प्रति को हाथ में लेकर उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली। शपथ लेने के बाद डीके ने मंच पर जनता के सामने झुककर उनका अभिवादन किया।

खरगे व राहुल सहित तमाम हस्तियों की रही मौजूदगी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और कई अन्य नेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। समारोह में शिवकुमार की मां गौरम्मा, पत्नी उषा और उनके बच्चों  के अलावा धार्मिक गुरु, फिल्म जगत की हस्तियां, खिलाड़ी और उद्योगपति भी मौजूद थे। 40 से अधिक धर्मगुरु समारोह में उपस्थित थे। इसके अलावा अभिनेता रविचंद्रन, अभिनेत्री जयमाला, किच्चा सुदीप, रम्या, पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद और अनिल कुंबले जैसी जानी-मानी हस्तियां भी मौजूद थीं।

अंततः साकार हुआ शिवकुमार का सपना

कुल मिलाकर देखें तो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही आठ बार के विधायक व कांग्रेस के अहम रणनीति कार माने जाने वाले डी.के. शिवकुमार का वह सपना साकार हो गया, जिसके लिए उन्होंने लंबे समय तक राजनीतिक संघर्ष किया। शिवकुमार और सिद्धरमैया के बीच पिछले तीन वर्षों से जारी खींचतान का अंत पिछले सप्ताह सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के साथ हुआ था।

सिद्धारमैया ने कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद गत 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और उनके इस कदम से दक्षिण भारत में पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले शिवकुमार के लिए यह पद ग्रहण करने का रास्ता साफ हुआ।

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