वॉशिंगटन, 6 जुलाई। अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को करीब 3.5 लाख हैती नागरिकों का टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) समाप्त करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अमेरिका में रह रहे हजारों हैती नागरिकों पर निर्वासन का खतरा बढ़ गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हैती गंभीर हिंसा, भूख, राजनीतिक अस्थिरता और मानवीय संकट से जूझ रहा है।
- क्या है टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS)?
टीपीएस अमेरिका की एक विशेष व्यवस्था है, जिसके तहत युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अन्य गंभीर संकट से प्रभावित देशों के नागरिकों को अमेरिका में अस्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति दी जाती है। इस दर्जे के तहत लाभार्थियों को निर्वासन से भी सुरक्षा मिलती है।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली स्थिति
इससे पहले डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया की जिला अदालत की न्यायाधीश एना सी. रेयेस ने ट्रंप प्रशासन के फैसले पर रोक लगा दी थी। बाद में संघीय अपीलीय अदालत ने भी इस रोक को बरकरार रखा।
हालांकि, जून में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि संघीय कानून के तहत टीपीएस से जुड़े फैसले न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आते। शीर्ष अदालत के इसी निर्णय के बाद न्यायाधीश रेयेस ने अपना पुराना आदेश वापस ले लिया, जिससे हैती नागरिकों की टीपीएस सुरक्षा पर लगी रोक समाप्त हो गई।
- करीब दो लाख हैती नागरिक कर रहे हैं काम
प्रवासी अधिकार संगठन एफडब्ल्यूडी.यूएस (FWD.us) के अनुसार, सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि टीपीएस के तहत संरक्षित लगभग दो लाख हैती नागरिक अमेरिका में कार्यरत हैं। इनमें बड़ी संख्या स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य सेवा, वेयरहाउसिंग, खुदरा व्यापार और दीर्घकालिक देखभाल जैसे क्षेत्रों में काम करती है।
- हैती अब भी सबसे जोखिम वाले देशों में शामिल
अमेरिकी विदेश विभाग ने हैती को अपनी यात्रा सलाह (Travel Advisory) में लेवल-4 श्रेणी में रखा है, जो सबसे उच्च जोखिम का स्तर माना जाता है। विभाग ने वहां अपराध, अपहरण, आतंकवादी गतिविधियों, सामाजिक अशांति और सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।
- हजारों प्रवासियों के भविष्य पर बढ़ी अनिश्चितता
अदालती फैसले के बाद अमेरिका में रह रहे हजारों हैती नागरिकों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। यदि ट्रंप प्रशासन टीपीएस समाप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाता है, तो बड़ी संख्या में लोगों को निर्वासन और कानूनी स्थिति से जुड़े गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

