नई दिल्ली, 1 सितम्बर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को देश के 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) के वार्षिक प्रदर्शन और प्रगति की व्यापक समीक्षा की। नई दिल्ली स्थित रक्षा सार्वजनिक उपक्रम भवन में हुई समीक्षा बैठक का मुख्य फोकस देश में रक्षा उत्पादन को और मजबूत करना, स्वदेशी तकनीकों का विकास, नवाचार को बढ़ावा देना और रक्षा निर्यात में तेजी लाने पर रहा।
राजनाथ सिंह ने इस दौरान डिफेंस पीएसयू से अगले पांच वर्षों के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया। यह रोडमैप बदलते समय और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने वाला होना चाहिए।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार राजनाथ सिंह ने सभी 16 डीपीएसयू के प्रदर्शन और अब तक हुई प्रगति का जायजा लिया तथा रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन में उनके उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि डीपीएसयू देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने और आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने डीपीएसयू को अपनी उत्पादन क्षमता, तकनीकी क्षमताओं और अनुसंधान एवं विकास को लगातार बेहतर बनाने पर जोर दिया, ताकि भारतीय सशस्त्र बलों की भविष्य की जरूरतों को देश में ही पूरा किया जा सके।
Reviewed the performance and progress of 16 DPSUs at DPSU Bhawan in New Delhi. Lauded their noteworthy contribution in record defence production.
Exhorted them to come up with a roadmap for the next five years to enhance defence preparedness in sync with changing times.… pic.twitter.com/6YIusYDiqM
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) September 1, 2026
समीक्षा के दौरान राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और नवाचार को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। उनका जोर ऐसी अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियां और तकनीक विकसित करने पर रहा, जो भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन जरूरतों के अनुरूप हों और देश को विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद करें। उन्होंने डीपीएसयू से नई तकनीकों को अपनाने, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने तथा बदलती युद्ध तकनीक और सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी क्षमताओं में बदलाव लाने को कहा।
रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने पर भी विशेष बल
राजनाथ सिंह ने रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने पर भी विशेष बल दिया। डिफेंस पीएसयू से कहा गया कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धी और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद विकसित करें।
भारत के बढ़ते रक्षा उत्पादों को निर्यात का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा
उल्लेखनीय है कि भारत के बढ़ते रक्षा उत्पादों को निर्यात का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है। डिफेंस पीएसयू की इसमें बड़ी भूमिका हो सकती है। रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि डिफेंस पीएसयू में बदलाव को केवल आर्थिक या औद्योगिक सुधार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, कि डिफेंस पीएसयू का रूपांतरण केवल आर्थिक या औद्योगिक आवश्यकता नहीं बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता है।
रक्षा मंत्री का यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब आधुनिक युद्ध तेजी से तकनीक आधारित हो रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियों, ड्रोन, साइबर क्षमताओं तथा उन्नत हथियार प्रणालियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
समीक्षा बैठक का व्यापक उद्देश्य डिफेंस पीएसयू को भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिए अधिक सक्षम, तकनीकी रूप से उन्नत और प्रतिस्पर्धी बनाना रहा। डिफेंस पीएसयू के प्रदर्शन में सुधार, स्वदेशी तकनीक पर जोर और निर्यात क्षमता बढ़ाने से भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार डिफेंस पीएसयू बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी कार्यप्रणाली व क्षमताओं में व्यापक बदलाव ला रहे हैं। इससे वे न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा कर सकेंगे बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित कर सकेंगे।


