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नासिक TCS मामला : कोर्ट का आरोपित निदा खान को अंतरिम जमानत देने से इनकार

नासिक TCS मामला : कोर्ट का आरोपित निदा खान को अंतरिम जमानत देने से इनकार

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मुंबई, 20 अप्रैल। देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक BPO यूनिट से जुड़े गंभीर यौन उत्पीड़न मामलों में कोर्ट ने एक अहम आरोपित निदा खान को 27 अप्रैल तक अंतरिम सुरक्षा देने की अर्जी खारिज कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक फरार निदा खान की कानूनी टीम ने अदालत से गुजारिश की थी कि जब तक उनकी अग्रिम जमानत याचिका लंबित है, तब तक उन्हें अस्थायी राहत दी जाए, लेकिन अदालत ने इस चरण पर कोई भी अंतरिम आदेश जारी न करने का फैसला किया।

आरोपित को 27 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का समय

सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ता के वकील बाबा सय्यद ने एक लिखित जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग करते हुए एक अर्जी पेश की। इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया और अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए 27 अप्रैल तक का समय दिया।

अग्रिम जमानत याचिका पर बहस के दौरान खान के वकील ने मेडिकल आधार का हवाला देते हुए कहा कि वह दो माह की गर्भवती हैं। वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत की अर्जी का विरोध किया और कोर्ट के सामने एक BPO पिकनिक और ट्रिप की कुछ तस्वीरें भी पेश कीं।

निदा खान HR का हिस्सा नहीं, वरन प्रोसेस एसोसिएट थीं

निदा खान के वकील ने यह भी सवाल उठाया कि उनकी मुवक्किल को ‘मास्टरमाइंड’ क्यों कहा जा रहा है जबकि उनका नाम सिर्फ एक FIR में है और कम्पनी में उनकी कोई लीडरशिप भूमिका नहीं थी। वह एक प्रोसेस एसोसिएट थीं, HR का हिस्सा नहीं। कोर्ट में इन शब्दों की कोई अहमियत नहीं है।

TCS का स्पष्टीकरण : निदा ने कभी HR मैनेजर का पद नहीं संभाला

पहले आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि निदा खान नासिक बीपीओ यूनिट में HR का काम संभाल रही थीं और महिला कर्मचारियों की शिकायतों पर काररवाई करने में नाकाम रही थीं। जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने धार्मिक धर्मांतरण को बढ़ावा दिया। हालांकि, TCS ने स्पष्ट किया कि वह HR मैनेजर नहीं थीं और उन्होंने कभी भी ऐसा कोई पद नहीं संभाला था।

Sc-ST एक्ट का लगाया जाना बहस का एक मुख्य मुद्दा

सुनवाई के दौरान बहस का एक मुख्य मुद्दा SC-ST एक्ट का लगाया जाना था। खान के वकील के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपों को सही साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। खान की तरफ से पेश वकील राहुल कसलीवाल ने कहा कि अंतरिम राहत पर बहस हुई और कोर्ट के सामने प्रेग्नेंसी की बात भी रखी गई। उन्होंने आगे कहा कि अग्रिम जमानत की सुनवाई में समय लगता है, इसलिए उन्होंने पहले अंतरिम सुरक्षा मांगी।

पुलिस का दावा – निदा खान ने निभाई अहम भूमिका

नासिक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहले कहा था कि लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, खासकर SC-ST एक्ट के तहत, यदि कोर्ट लगाए गए सेक्शन पर सख्ती से अमल करता है, तो निदा खान को अग्रिम जमानत शायद न मिले। पुलिस अधिकारियों ने अपनी जांच पर भरोसा जताया और दावा किया कि खान ने कथित धर्मांतरण की गतिविधियों में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि इस मामले से और भी पीड़ित जुड़े हैं, लेकिन डर और सामाजिक दबाव की वजह से कई लोग सामने नहीं आए हैं।

निदा खान को पकड़ने के लिए पुलिस का व्यापक तलाशी अभियान जारी

इस बीच पुलिस ने निदा खान का पता लगाने के लिए एक तलाशी अभियान शुरू चला रखा है, जो मामला सामने आने के बाद से ही फरार है। वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने कार्यस्थल पर सुरक्षा का जायज़ा लेने के लिए नासिक में एक टीम भेजी है जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने महाराष्ट्र पुलिस और TCS को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

जांचकर्ताओं का कहना है कि डिजिटल सबूत अहम भूमिका निभा रहे हैं। आरोप हैं कि पीड़ितों का सोशल मीडिया के जरिए पीछा किया गया और उन्हें परेशान किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, नासिक ब्रांच की महिला कर्मचारियों की शिकायतों के आधार पर 26 मार्च से तीन अप्रैल के बीच कम से कम नौ FIR दर्ज की गई हैं।

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