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पश्चिम एशिया संघर्ष पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मोदी सरकार के तटस्थ रुख का किया समर्थन, कहा- ‘यह हमारा युद्ध नहीं’

पश्चिम एशिया संघर्ष पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मोदी सरकार के तटस्थ रुख का किया समर्थन, कहा- ‘यह हमारा युद्ध नहीं’

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नई दिल्ली, 19 मार्च। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गुरुवार को पश्चिम एशिया संघर्ष पर मोदी सरकार के संतुलित रुख का समर्थन करते हुए कहा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र में सीमित भूमिका निभाई है और उसे रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देनी चाहिए। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर उन्होंने कहा कि संकट के पैमाने और जटिलता को देखते हुए नई दिल्ली का सतर्क कूटनीतिक दृष्टिकोण उचित था।

मनीष तिवारी ने इस बात पर जोर दिया कि यह क्षेत्र एक ही युद्ध का नहीं, बल्कि कई आपस में जुड़े संघर्षों का गवाह बन रहा है। उन्होंने कहा, ‘इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच जो कुछ हो रहा है, वह सिर्फ मध्य पूर्व की अपनी गतिशीलता तक ही सीमित नहीं है…असल में, यह हमारा युद्ध नहीं है। वृहद मध्य पूर्व क्षेत्र में हमारी भूमिका हमेशा से ही काफ़ी सीमित रही है।’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत को उन भू-राजनीतिक लड़ाइयों में उलझने से बचना चाहिए, जिनका उससे सीधे तौर पर कोई लेना-देना नहीं है।

भारत सावधानी बरतकर सही काम कर रहा

संयम बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए तिवारी ने कहा कि भारत सावधानी बरतकर सही काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा, ‘अगर हम सावधानी बरत रहे हैं तो मुझे लगता है कि शायद हम सही काम कर रहे हैं क्योंकि रणनीतिक स्वायत्तता का असली मतलब यही है – अपने हितों की रक्षा करने और परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ने की क्षमता।’

उल्लेखनीय है कि संकट की शुरुआत से ही भारत ने इस पूरे क्षेत्र में अपने हितों को संतुलित करते हुए लगातार बातचीत और कूटनीति का आह्वान किया है। हालांकि नई दिल्ली ने खाड़ी क्षेत्र में ईरान के हमलों की निंदा की, लेकिन उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेहरान के साथ अपना संपर्क भी तेज कर दिया – यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जिससे दुनियाभर की 20 फीसदी ऊर्जा आपूर्ति होती है।

यह संघर्ष गत 28 फरवरी को तब शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के भीतर समन्वित हमले किए और कई जगहों पर लक्ष्यों को निशाना बनाया। वहीं तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में वॉशिंगटन और येरूसलम से जुड़ी सैन्य सुविधाओं पर अपने जवाबी हमले किए, जिससे एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। इस बीच, भारत इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता वैश्विक स्थिति के लिए खतरा पैदा कर रही है।

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