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मुख्यमंत्री योगी का छात्रों को संदेश- असफलता से न हों निराश, चरैवेति-चरैवेति के मंत्र के साथ बढ़ते रहें आगे

लखनऊ, 27 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा के परिणामों के बाद छात्रों के नाम संदेश लिखा है। उन्होंने सफल छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि अनेक बच्चों ने लगन और कठिन परिश्रम से पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। इस दौरान, सीएम योगी ने परीक्षाओं में असफल छात्रों का भी उत्साहवर्धन किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘योगी की पाती’ में लिखा, “यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षाओं के परीक्षा परिणाम आ चुके हैं। इस वर्ष का परीक्षाफल अत्यंत उत्साहजनक है। अनेक बच्चों ने लगन और कठिन परिश्रम से पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। मेरी ओर से सभी बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य की ढेरों बधाइयां और आशीर्वाद।”

इस दौरान, सीएम योगी ने कहा, “मेरी यह पाती, विशेषकर उन बच्चों के लिए है, जो किन्हीं कारणों से अपेक्षित परिणाम नहीं ला पाये। सफलता और असफलता जीवन के अंग हैं। सफलता हमें उत्साहित करती है, लेकिन असफलता से निराशा घर कर सकती है। बस, हमें इसी निराशा को हटाकर ‘चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र पर आगे बढ़ना है। ‘चलते रहो-चलते रहो’ का यह सूत्र वाक्य हमें निरंतर परिश्रम, प्रगति और जीवन में न रुकने का संदेश देता है।” उन्होंने छात्रों से कहा, “याद रखिये, एक असफलता भविष्य की असीमित सफलताओं और संभावनाओं की जननी हो सकती है। कोई भी परिणाम जीवन का पहला और अंतिम नहीं होता, अपितु एक नए आरंभ का अवसर होता है।

सोना तपकर ही कुंदन बनता है।” महान आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “थॉमस अल्वा एडिसन ने बल्ब का आविष्कार करने के लिए हजारों प्रयोग किए। हर प्रयोग नाकाम रहा, लेकिन थॉमस एडिसन ने प्रयास जारी रखे। आखिरकार मेहनत रंग लाई और उन्होंने बल्ब का आविष्कार करके पूरी दुनिया को आलोकित किया। विश्व के सर्वश्रेष्ठ गणितज्ञों में एक श्रीनिवास रामानुजन से लेकर ऐसी कई अन्य महान विभूतियां हुई, जिन्होंने बाधाओं व असफलताओं से हार नहीं मानी, बल्कि अपने क्षेत्र में शिखर पर पहुंचे।”

इसी बीच, मुख्यमंत्री योगी ने अभिभावकों के नाम भी संदेश दिया। उन्होंने लिखा, “प्रिय अभिभावकों, कुछ बातें मैं आपसे भी कहना चाहता हूं। बच्चे देश का भविष्य हैं। यदि किसी कारणवश वे अपेक्षित परिणाम नहीं ला पाए, तो निराश होने के बजाय उनका हौसला बढ़ाएं। उनकी रुचि किस विषय में है, इसे समझने का प्रयास करें। ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां करियर निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। इन अवसरों को पहचानने में बच्चों की मदद करें। उनकी प्रतिभा को खिलने दें।”

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