चारधाम यात्रा प्रारंभ : सीएम धामी ने गंगोत्री धाम में की पूजा-अर्चना, श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा
उत्तरकाशी (उत्तराखंड), 19 अप्रैल। वैदिक मंत्रोचार, धार्मिक अनुष्ठान और जय मां गंगे के जयकारों के साथ रविवार को अक्षय तृतीया के पर्व पर गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद इस दिव्य पल के साक्षी बने।
सीएम धामी ने श्री गंगोत्री धाम में पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही मंदिर के द्वार औपचारिक रूप से खोल दिए गए, जो वार्षिक चारधाम यात्रा के प्रारंभ का प्रतीक है। वहीं यमुनोत्री धाम के द्वार भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। दोनों तीर्थस्थलों को फूलों से सजाया गया। अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों की भीड़ को संभालने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी।

तय मुहूर्त पर दोपहर 12.15 पर गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के समय हजारों तीर्थयात्री मंदिर प्रांगण में मौजूद रहे। इस दौरान ‘हर-हर गंगे’ और ‘मां गंगा की जय’ के जयकारों से पूरा गंगोत्री धाम गूंज उठा। इस दौरान धाम में मौजूद भक्तों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा भी की गई।
इस अवसर पर धूमधाम से उत्सव मनाया गया, जिसमें ढोल दमाऊ और रानसिंघा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण गूंज उठा। गढ़वाल राइफल्स बैंड ने भी इसमें भाग लिया, जिससे देवी का उनके ग्रीष्मकालीन निवास में स्वागत करते समय समारोह में एक औपचारिक स्पर्श जुड़ गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, पुजारियों, साधुओं और अधिकारियों ने जुलूस में भाग लिया, जो तीर्थयात्रा से जुड़ी सामूहिक आस्था और एकता को रेखांकित करता है।
भगवान केदारनाथ की ‘डोली’ रवाना
इसी बीच रविवार को ओंकारेश्वर मंदिर से भगवान केदारनाथ की औपचारिक ‘डोली’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो हिमालय में स्थित केदारनाथ धाम की उसकी वार्षिक यात्रा की शुरुआत का संकेत है। भगवान केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को, जो उखीमठ में अपने शीतकालीन निवास स्थान पर रहती है, वैदिक मंत्रों, भक्ति संगीत और भक्तों की उत्साही भागीदारी के साथ एक भव्य जुलूस में ले जाया गया।
मंदिर परिसर को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था, लगभग आठ क्विंटल फूलों का उपयोग आध्यात्मिक वातावरण को बढ़ाने के लिए किया गया था। श्रद्धालुओं ने उत्सव के हिस्से के रूप में सामुदायिक भोज या भंडारा का आयोजन भी किया। जुलूस के दौरान गढ़वाल राइफल्स ने एक प्रमुख औपचारिक भूमिका निभाई, जिसमें सैन्य परंपरा को लंबे समय से चली आ रही धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मिश्रित किया गया।
22 व 23 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ व बद्रीनाथ धाम के कपाट
कार्यक्रम के अनुसार, डोली पहली रात फाटा में रुकेगी और सोमवार को गौरीकुंड के लिए रवाना होगी। इसके 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचने की उम्मीद है, जहां प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। केदारनाथ मंदिर के द्वार 22 अप्रैल को सुबह आठ बजे पूर्ण वैदिक अनुष्ठानों के साथ खुलने वाले हैं, जिसके बाद 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के द्वार भी खुलेंगे। देशभर से हजारों श्रद्धालु इस तीर्थयात्रा के लिए एकत्रित हुए हैं, जो चार धाम यात्रा के गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व को उजागर करता है।
