अयोध्या, 20 जुलाई। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के दानपात्रों में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धनराशि की गणना फिर से दो शिफ्टों में शुरू कर दी है। सप्ताहभर के परीक्षण के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की टीम को नियमित रूप से दो शिफ्टों में गणना कराने की व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसी बीच राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में भी अहम सुनवाई होनी है।
दो शिफ्टों में होगी चढ़ावे की गणना
ट्रस्ट के अनुसार, शनिवार से दानपात्रों की गणना दो शिफ्टों में शुरू कर दी गई है। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से शाम 8 बजे तक चलेगी। प्रत्येक शिफ्ट में 10 से 12 सदस्यों की टीम चढ़ावे की गिनती कर रही है।
शोभनाथ मिश्र बने नए गणना प्रभारी
पूर्व गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के जेल जाने के बाद ट्रस्ट ने शोभनाथ मिश्र को नया गणना प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं, पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक अतिरिक्त पूर्व सैनिक को जोड़ते हुए चार कर्मियों की तैनाती की गई है। गणना की दैनिक रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी ट्रस्ट के सुरक्षा प्रभारी कैप्टन केके तिवारी को वरिष्ठ प्रभारी के रूप में सौंपी गई है। इसके अलावा एसपी दुबे, शेषमणि तिवारी और शोभनाथ मिश्र को ट्रस्ट प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया है।
आज सुप्रीम कोर्ट में होगी अहम सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत में दाखिल कर दी है। इस रिपोर्ट पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ सुनवाई करेगी। इस मामले से जुड़ी चार अलग-अलग याचिकाएं भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, जिन पर भी आज सुनवाई होने की संभावना है।
यूपी सरकार ने गठित की थी एसआईटी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। जांच के दौरान कई अहम खुलासे हुए और कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। एसआईटी में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं।
पहले स्वीकार हो चुके हैं चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे
इस बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे पहले ही स्वीकार किए जा चुके हैं। इसके बाद ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में कई प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं।

