न्यूयॉर्क, 26 सितंबर। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में शुक्रवार को भारत और कश्मीर से जुड़े मुद्दे उठाए। अपने संबोधन में उन्होंने सिंधु जल संधि को लेकर भारत को चेतावनी दी और कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रुख मोड़ने की किसी भी कोशिश को उनका देश ‘एक्ट ऑफ वॉर’ यानी युद्ध की कार्रवाई मानेगा।
सिंधु जल को लेकर भारत को चेतावनी
शहबाज शरीफ ने कहा कि सिंधु नदी क्षेत्र के लिए जीवनरेखा है और पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी को लेकर किसी भी कदम का विरोध करेगा। उन्होंने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के रुख पर आपत्ति जताई और पानी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं करने की बात कही। सिंधु जल संधि 1960 में भारत, पाकिस्तान और विश्व बैंक की भागीदारी में हुई थी और इसे संयुक्त राष्ट्र संधि संग्रह में दर्ज किया गया है।
पाकिस्तान लंबे समय से भारत के सिंधु जल संधि को ‘abeyance’ में रखने के फैसले का विरोध करता रहा है। सितंबर 2026 में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी दावा किया था कि मध्यस्थता अदालत ने संधि को प्रभावी और बाध्यकारी माना है। यह पाकिस्तान के आधिकारिक रुख का हिस्सा है।
कश्मीर का मुद्दा भी उठाया
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों को राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा। शहबाज शरीफ ने दक्षिण एशिया में भविष्य में तनाव की स्थिति से बचने के लिए कश्मीर मुद्दे के समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
भारत पर लगाए कई आरोप
अपने संबोधन के दौरान शहबाज शरीफ ने भारत की नीतियों और आंतरिक परिस्थितियों को लेकर भी कई आरोप लगाए। इन दावों को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के वक्तव्य के रूप में देखा जाना चाहिए; भारत इन मुद्दों पर अलग रुख रखता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र 8 सितंबर 2026 को शुरू हुआ है। इस सत्र की आम बहस 22 से 26 सितंबर और 28 सितंबर को आयोजित की जा रही है।


