Uttarakhand Waqf Board: तीन तलाक और हलाला पीड़ित बेघर महिलाओं को मिलेगा सहारा, रोजगार से जोड़ने की तैयारी

देहरादून, 26 सितंबर। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने तीन तलाक और हलाला से प्रभावित बेघर एवं बेसहारा महिलाओं को सहायता देने की पहल का ऐलान किया है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा कि बोर्ड की जमीन और संपत्तियों का इस्तेमाल जरूरतमंदों के हित में करने की दिशा में काम किया जाएगा। शादाब शम्स के मुताबिक, वक्फ बोर्ड के पास मौजूद लैंड बैंक और संपत्तियों को उनके मूल उद्देश्य के अनुरूप इस्तेमाल करने पर सरकार के साथ चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि बोर्ड के पास कई घर और दूसरी संपत्तियां हैं और इन्हें जरूरतमंद लोगों के लिए बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है।

अगले महीने प्रस्ताव रखने की तैयारी

शादाब शम्स ने बताया कि बोर्ड की आगामी बैठक में एक प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके तहत तीन तलाक या हलाला से प्रभावित ऐसी महिलाओं को रहने की जगह उपलब्ध कराने की योजना है, जो बेघर या बेसहारा हैं। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को आश्रय देने के साथ उन्हें रोजगार से जोड़ने की भी कोशिश की जाएगी, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें।

वक्फ संपत्तियों के इस्तेमाल पर जोर

शादाब शम्स ने कहा कि वक्फ संपत्तियां मूल रूप से जरूरतमंद लोगों की मदद और कल्याण के उद्देश्य से जुड़ी रही हैं। उन्होंने यतीमों, मिस्कीनों, विधवाओं और बेसहारा लोगों के लिए इन संसाधनों के इस्तेमाल की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों से जुड़े कुछ लोगों के हस्तक्षेप के कारण वक्फ के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचा। हालांकि, उन्होंने कहा कि बोर्ड की कोशिश अब वक्फ संपत्तियों के मूल उद्देश्य को जमीन पर लागू करने की है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

वक्फ बोर्ड चेयरमैन ने कहा कि सिर्फ रहने की जगह उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होगा। ऐसी महिलाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा, ताकि वे अपने बच्चों की जिम्मेदारी खुद उठा सकें और किसी पर निर्भर न रहें।

उन्होंने उत्तराखंड में सामने आए हलाला से जुड़े कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चिंता रहने और परिवार का सहारा मिलने की होती है। बोर्ड का प्रस्ताव इसी तरह की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के साथ इस पहल को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

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