नई दिल्ली, 18 अगस्त। चेहरे की खूबसूरती और त्वचा की देखभाल पर तो अधिकांश लोग ध्यान देते हैं, लेकिन हाथों की उंगलियों के जोड़ यानी नकल्स, कोहनी और घुटनों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इन हिस्सों पर कालापन कई बार त्वचा की सामान्य मोटाई, घर्षण और रूखेपन की वजह से हो सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में लगातार या अचानक बढ़ता कालापन शरीर में होने वाले बदलावों का संकेत भी हो सकता है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, नकल्स, कोहनी और घुटनों की त्वचा शरीर के कई अन्य हिस्सों की तुलना में मोटी होती है। इन जगहों पर बार-बार दबाव और घर्षण पड़ने से त्वचा की ऊपरी परत मोटी हो सकती है, जिससे वह हिस्सा अधिक गहरा दिखाई देता है।
बार-बार घर्षण से बढ़ सकता है कालापन
जब त्वचा पर लगातार रगड़ या दबाव पड़ता है, तो शरीर एक तरह की सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर वहां पिगमेंटेशन बढ़ा सकता है। मेलेनिन त्वचा के रंग के लिए जिम्मेदार पिगमेंट है। घर्षण या बार-बार होने वाली जलन के कारण प्रभावित हिस्से में मेलेनिन का उत्पादन बढ़ सकता है और त्वचा का रंग गहरा दिखाई देने लगता है। इसलिए नकल्स, कोहनी और घुटनों के काले होने का कारण हमेशा गंदगी या सफाई की कमी नहीं होता।
अचानक बढ़े कालापन तो इन कारणों पर दें ध्यान
अगर उंगलियों के जोड़ों, कोहनी या घुटनों का कालापन अचानक बढ़ने लगे या लंबे समय तक बना रहे, तो इसे केवल कॉस्मेटिक समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में त्वचा का गहरा पड़ना इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी स्थिति से जुड़ा हो सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस में शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इसके अलावा कुछ लोगों में विटामिन बी12 की कमी भी त्वचा के रंग में बदलाव से जुड़ी हो सकती है। खासतौर पर अगर उंगलियों के जोड़ों पर असामान्य रूप से ज्यादा कालापन दिखाई दे, तो पोषण संबंधी कमी की जांच के लिए डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। थायरॉइड से जुड़ी कुछ समस्याएं और एडिसन डिजीज जैसी स्थितियां भी त्वचा में बदलाव का कारण बन सकती हैं। अगर कालापन लंबे समय से है और इसके साथ कमजोरी, वजन में बदलाव या अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
त्वचा की देखभाल में रखें इन बातों का ध्यान
नकल्स, कोहनी और घुटनों की त्वचा को साफ रखने के साथ-साथ मॉइस्चराइज करना भी जरूरी है। बहुत ज्यादा रगड़कर स्क्रब करने से बचें, क्योंकि इससे त्वचा में जलन बढ़ सकती है और पिगमेंटेशन और गहरा हो सकता है।
कुछ लोग घरेलू उपायों का भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन संवेदनशील त्वचा पर किसी भी चीज को लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर है।
दही और हल्दी का इस्तेमाल
दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है, जो त्वचा की ऊपरी मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। हल्दी में करक्यूमिन जैसे यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण होते हैं। घरेलू तौर पर थोड़ी मात्रा में दही में हल्दी मिलाकर प्रभावित हिस्से पर लगाया जाता है। कुछ देर बाद इसे सामान्य पानी से धो सकते हैं। हालांकि, जलन या एलर्जी महसूस होने पर इसे तुरंत हटा दें।
आलू और नींबू से सावधान
आलू और नींबू को त्वचा का कालापन कम करने के लिए घरेलू नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड त्वचा को एक्सफोलिएट करने में मदद कर सकता है, लेकिन सीधे नींबू का रस लगाने से संवेदनशील त्वचा में जलन, रूखापन या धूप के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है।
इसलिए नींबू जैसे अम्लीय पदार्थों को त्वचा पर लगाने में सावधानी बरतना जरूरी है।
बादाम, मलाई और एलोवेरा भी हो सकते हैं मददगार
बादाम में विटामिन ई पाया जाता है, जबकि मलाई त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद कर सकती है। इसी तरह एलोवेरा त्वचा में नमी बनाए रखने और रूखेपन को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इन घरेलू उपायों से कालापन पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं है। अगर समस्या लगातार बनी हुई है, तेजी से बढ़ रही है या शरीर के अन्य हिस्सों में भी त्वचा का रंग बदल रहा है, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।


