नई दिल्ली, 17 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। इसके जरिए उन्होंने सामूहिक संकल्प, एकता और सहयोग की शक्ति को भारत की प्रगति और समृद्धि की आधारशिला बताया। पीएम मोदी ने कहा कि देश तभी आगे बढ़ता है, जब लोगों के संकल्प और प्रयास एक दिशा में हों।
- पीएम मोदी ने शेयर किया एकता का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, “सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति से ही देश आगे बढ़ता है। यही भावना भारत की प्रगति और समृद्धि की मजबूत नींव है।” इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने यह संस्कृत श्लोक साझा किया—
“समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः।
समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥”
इसका भावार्थ है कि सभी लोगों के संकल्प एक समान हों और उनके हृदय एकता की भावना से जुड़े रहें। इससे समाज में परस्पर सहयोग और समान व्यवहार की भावना मजबूत होगी और लोग मिलकर समाज की उन्नति के लिए लगातार प्रयास कर सकेंगे।
- लगातार सुभाषित शेयर कर रहे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर संस्कृत के सुभाषित साझा कर रहे हैं। इन श्लोकों के जरिए वह परिश्रम, संकल्प, आत्मविश्वास, एकता और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर संदेश दे रहे हैं। इससे पहले 14 अगस्त को भी पीएम मोदी ने एक सुभाषित साझा किया था। यह पोस्ट विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर की गई थी।
- विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर दिया था संदेश
14 अगस्त को प्रधानमंत्री ने लिखा था कि विभाजन की त्रासदी झेलने वाले सभी देशवासियों को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि उन लोगों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने साहस और सामर्थ्य से देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पीएम मोदी ने देशवासियों से सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और मजबूत करने का आह्वान किया था।
- उन्होंने इस मौके पर यह सुभाषित भी साझा किया था—
“उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”
इसका अर्थ है कि परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही कला, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प और नवाचार विकसित होते हैं। मनुष्य को केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि साहस और लगातार प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए।
- 13 अगस्त को भी शेयर किया था सुभाषित
इससे एक दिन पहले 13 अगस्त को पीएम मोदी ने एक और संस्कृत श्लोक साझा किया था—
“दैवं पुरुषकारेण यः समर्थः प्रबाधितुम्।
न दैवेन विपन्नार्थः पुरुषः सोऽवसीदति॥”
इसका भावार्थ है कि जो व्यक्ति दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और पुरुषार्थ के जरिए विपरीत परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखता है, वह जीवन की बाधाओं से हार नहीं मानता। निरंतर प्रयास करते हुए वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहता है और अंततः सफलता हासिल करता है।
- एकता, संकल्प और पुरुषार्थ पर पीएम का जोर
प्रधानमंत्री के लगातार साझा किए जा रहे इन सुभाषितों में एक साझा संदेश दिखाई देता है-भाग्य के बजाय पुरुषार्थ, निराशा के बजाय संकल्प और विभाजन के बजाय एकता। सोमवार को साझा किए गए श्लोक के जरिए भी पीएम मोदी ने सामूहिक प्रयास और एकजुटता को देश की प्रगति का आधार बताया।

