रविशंकर प्रसाद का चिदंबरम पर तीखा हमला, बोले- ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी वापस लेकर दें स्पष्टीकरण

पटना, 16 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी ने कुछ ज्यादा ही सियासी गर्मी ला दी है और कांग्रेस व भाजपा नेता एक-दूसरे पर व्यंगबाण छोड़ने लगे हैं।

चिदंबरम ने कहा – “मुझे ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है”

इस क्रम में देश के पूर्व केंद्रीय गृह व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने रविवार की सुबह एक्स पोस्ट में पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने का गर्व है। इससे पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस नेता जयराम रमेश, पवन खेड़ा, CPI(M) महासचिव एम ए बेबी व CPI महासचिव डी राजा समेत तमाम विपक्षी नेताओं ने भी पीएम मोदी के इस बयान पर उन्हें घेरा था।

वहीं शाम होते-होते पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद कांग्रेस नेता चिदंबरम पर तीखा हमला बोला और उनके बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने यहां प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से वर्ष 2047 तक विकसित भारत का स्पष्ट रोडमैप देश के सामने रखा। उन्होंने युवाओं, किसानों और समाज के सभी वर्गों की बात करते हुए माओवाद और नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया था। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा था कि नक्सलवाद का प्रभाव समाप्त होने के बावजूद कुछ लोग अब भी मानसिक रूप से नक्सली सोच रखते हैं।

पूर्व गृह मंत्री होने के नाते संदर्भ समझना चाहिए था

प्रसाद ने कहा कि इसके बाद पी. चिदंबरम का यह कहना कि ‘मोदी जी, मैं भी दिमागी रूप से नक्सली हूं’ बेहद आपत्तिजनक और गैर-जिम्मेदाराना है। चिदंबरम देश के पूर्व गृह मंत्री, राज्यसभा सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रहे हैं। ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री के बयान के संदर्भ और उद्देश्य को समझना चाहिए था। उन्होंने चिदंबरम से अपना बयान वापस लेने और उस पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।

माओवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली

भाजपा सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों के कारण देश में माओवाद और नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है। आज बस्तर समेत उन क्षेत्रों में तिरंगा शान से लहरा रहा है, जहां कभी नक्सलवाद का प्रभाव था। छत्तीसगढ़ का प्रभारी रहते हुए उन्होंने स्वयं इन क्षेत्रों का दौरा किया है और वहां आए बदलाव को करीब से देखा है। जिन इलाकों में कभी चुनाव प्रचार करना भी मुश्किल होता था, वहां आज लोकतंत्र मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा से प्रभावित महिलाओं और युवाओं का मुख्यधारा में लौटना इस बदलाव का प्रमाण है।

कांग्रेस पर लगाया नक्सलवाद के प्रति नरम रवैये का आरोप

रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का एक पूरा इकोसिस्टम लंबे समय से माओवादियों और नक्सलवादियों के प्रति नरम रवैया रखता रहा है। चिदंबरम के बयान को उन्होंने इसी मानसिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ और ‘अर्बन नक्सल’ इसी सोच के अलग-अलग रूप हैं। जो लोग निर्दोषों की हत्या और अत्याचार को बढ़ावा देने वालों के समर्थन में खड़े होते हैं, उन्हें देश की जनता को जवाब देना चाहिए।

भाजपा सांसद ने कहा कि माओवादी विचारधारा का मूल सिद्धांत कभी यह था कि सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा का सामना करने का अपना अनुभव भी साझा किया। सुकमा की एक घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ने की चुनौती देने के बाद नक्सलियों ने भाजपा के एक उपाध्यक्ष की हत्या कर दी थी। इसके बावजूद भाजपा ने लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखा।

‘वंदे मातरम्’ को लेकर भी कांग्रेस पर हमला

प्रेस वार्ता में रविशंकर प्रसाद ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि 15 अगस्त के कार्यक्रम में कांग्रेस नेतृत्व की ओर से वंदे मातरम् के पूरे गायन को लेकर आपत्ति जताई गई। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका का दावा करने वाली कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व द्वारा राष्ट्रगीत के प्रति इस तरह का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कांग्रेस से वंदे मातरम् के प्रति अपने रवैये को लेकर देश से माफी मांगने की मांग की।

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