चंडीगढ़/नई दिल्ली, 7 अगस्त। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच फिर गठबंधन बनने की अटकलों को फिर हवा मिली, जब शुक्रवार को अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद भवन में मुलाकात की।
उल्लेखनीय है कि पंजाब में कभी भाजपा के साथ मिलकर सत्ता संभाल चुके शिरोमणि अकाली दल ने किसान आंदोलन 2020 के चलते राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से नाता तोड़ लिया था। वहीं बीते चुनाव (2022) में आम आदमी पार्टी (AAP) ने भारी बहुमत से न सिर्फ कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया था वरन अलग-अलग चुनाव लड़े भाजपा व अकाली दल को भी गहरी निराशा हाथ लगी थी।
केजरीवाल का तंज – ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे
हालांकि पीएम मोदी और सुखबीर बादल की बैठक के बाद किसी ने भी अकाली-बीजेपी गठबंधन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन विपक्ष ने भी इस मीटिंग पर तंज कसना शुरू कर दिया है। दोनों नेताओं की इस मुलाकात के बाद दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने तंज कसते हुए कहा कि आप मुझसे प्यार नहीं करते, तो चंदा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी अलायंस क्यों कर रहे हैं? केजरीवाल ने X पर एक पोस्ट में कहा, ‘ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे। तो क्या चन्दा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?’
ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे।
तो क्या चन्दा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?
Sukhbir Singh Badal meets PM Modi at Parliament House; key discussions underway | Punjab – PTC News https://t.co/xlpm2l5UZ8
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 7, 2026
बादल बोले – पंजाब की कानून व्यवस्था को लेकर पीएम मोदी से मुलाकात की
वहीं, इस मुलाकात पर सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पंजाब की कानून व्यवस्था को लेकर पीएम मोदी से मुलाकात की है। इसके साथ-साथ राज्य में चल रहीं सरकारी योजनाओं में करप्शन को लेकर भी बात हुई। उल्लेखनीय है कि शिरोमणि अकाली दल और भाजपा हमेशा से राज्य की AAP सरकार को तमाम मुद्दों पर घेरती रही है।
पीएम मोदी ने जुलाई में रैली में दिया था बड़ा बयान
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने पंजाब दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जालंधर में भाजपा की एक रैली के दौरान अपने बयान से राजनीति में भूचाल ला दिया था। पीएम मोदी ने पंजाब में अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल पर सीधा और तीखा हमला किया था। उन्होंने कहा कि पंजाब में शिरोमणि अकाली दल अपने ही स्वार्थ में फंसी हुई पार्टी है। उसे पंजाब के लोगों की कोई परवाह नहीं है। पंजाब के लोग इन पुरानी पार्टियों की पॉलिटिक्स से तंग आ चुके हैं। पीएम मोदी ने साफ कर दिया था कि भारतीय जनता पार्टी ने अकाली दल के बिना पंजाब में अपने दम पर आगे बढ़ने का मन बना लिया है।
हालांकि प्रधानमंत्री के हमले के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी पार्टी के खिलाफ कुछ नहीं कहा। प्रधानमंत्री का इशारा अकाली दल के बागी गुट ‘शिरोमणि अकाली दल पुनर्सुरजीत’ की तरफ था, जो अपने ही स्वार्थ में लगा हुआ है.
2020 में टूटा था 25 वर्षों का साथ
देखा जाए तो शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच पंजाब में गठबंधन लगभग ढाई दशक तक रहा। शिवसेना और अकाली दल, बीजेपी के सबसे पुराने साथी थे। 1992 तक BJP और अकाली दल अलग-अलग चुनाव लड़ते थे, लेकिन चुनाव के बाद साथ आ गए थे। 1994 तक शिरोमणि अकाली दल सिर्फ सिखों को रिप्रेजेंट करने वाली पार्टी थी, लेकिन अलायंस के बाद दूसरे धर्मों के लोगों के लिए भी दरवाजे खुल गए। इसके बाद 1997 में भाजपा और अकाली दल ने मिलकर चुनाव लड़ा। अकाली-बीजेपी अलायंस पंजाब में वर्ष 1997, 2007 और फिर 2012 में सफल रहा और दोनों मिलकर सत्ता में आए। 2017 के विधानसभा चुनाव में अलायंस कांग्रेस के हाथों सत्ता खो बैठा और 2020 में खेती के कानूनों की वजह से 25 वर्ष पुराना अलायंस टूट गया।
हरसिमरत कौर ने दिया इस्तीफा और खत्म हुआ गठबंधन
हालांकि पहले अकाली दल ने इन किसान कानूनों पर केंद्र का साथ देने की बहुत कोशिश की थी, लेकिन लोगों का दबाव देखते हुए 17 दिसम्बर, 2020 को सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल ने किसान कानूनों के विरोध में केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। दोनों पार्टियों ने इसके बाद 2022 का विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा। अकाली दल ने इसी बीच बहुजन समाज पार्टी के साथ अलायंस करके एक नया एक्सपेरिमेंट किया, जो बुरी तरह फेल हो गया।

