लखनऊ, 10 जुलाई। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव से मिलने और उनके साथ फोटो खिंचवाने के नाम पर कार्यकर्ताओं से हजारों रुपये की वसूली की जा रही है।
राजभर ने यह आरोप सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक लंबी पोस्ट के जरिए लगाया। उन्होंने कहा कि यह शिकायत उन्हें खुद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि यह व्यवस्था नहीं रुकी तो पार्टी को भविष्य में बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
‘कार्यकर्ताओं ने सुनाया अपना दर्द’
ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कुछ सपा कार्यकर्ता उनसे मिलने आए थे। बातचीत के दौरान उन्होंने शिकायत की कि अखिलेश यादव के करीबी लोग उनसे मिलने के लिए पैसे मांगते हैं। राजभर के मुताबिक, कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फोटो खिंचवाने के लिए 5,000 रुपये, हाथ मिलाने के लिए 8 से 10 हजार रुपये और मुलाकात कराने के लिए अलग से रकम वसूली जाती है।
‘अगर यादव कार्यकर्ताओं का यह हाल है तो बाकी का क्या?’
राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि “धरतीपुत्र के पुत्र” को ऐसी नौबत क्यों आ गई कि अपने ही कार्यकर्ताओं से वसूली करनी पड़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यादव समाज के कार्यकर्ताओं से ऐसा व्यवहार हो रहा है तो अन्य लोगों से कितना पैसा लिया जाता होगा।
संपत्ति और ‘एक्स्ट्रा इनकम’ पर भी उठाए सवाल
सुभासपा प्रमुख ने अखिलेश यादव की संपत्ति का जिक्र करते हुए लिखा कि जब उनकी संपत्ति में कई गुना बढ़ोतरी हो चुकी है, तो फिर इस तरह की “एक्स्ट्रा इनकम” की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि यह वसूली अखिलेश यादव के करीबी लोग कर रहे हैं तो उन्हें तत्काल इस पर रोक लगानी चाहिए।
‘गेट पर रेट का काउंटर बंद कराइए’
राजभर ने अखिलेश यादव को “मित्र” बताते हुए सलाह दी कि कार्यकर्ताओं से मुलाकात और फोटो के नाम पर कथित वसूली बंद कराई जाए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा। राजभर ने यह भी कहा कि जनता के साथ-साथ खुद नाराज कार्यकर्ता भी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

