लखनऊ, 22 जून। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्षा ऋतु और चातुर्मास के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को विशेष पाती (पत्र) लिखकर प्रकृति संरक्षण, जल संवर्धन, स्वच्छता और जनभागीदारी का महत्वपूर्ण संदेश दिया है।पाती में सीएम योगी ने लिखा, “प्रकृति का प्रत्येक परिवर्तन जीवन का नया संदेश लेकर आता है। वर्षा ऋतु नवसृजन, संवर्धन और समृद्धि का प्रतीक है।”
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है और हमारे अन्नदाता ही प्रदेश व देश की खाद्य सुरक्षा की मजबूत नींव हैं। वर्षा की पहली बूंदों की सुगंध किसानों के जीवन में नई ऊर्जा भर देगी। वर्षा ऋतु के साथ शुरू होने वाला चातुर्मास हमें प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व, संवेदनशीलता और संतुलित जीवन जीने का संदेश देता है।“माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” अर्थात् यह भूमि हमारी माता है और हम इसके पुत्र हैं। इसलिए वर्षा का स्वागत करते हुए धरती मां के प्रति अपने दायित्वों को भी निभाना हमारा कर्तव्य है।
सीएम योगी के पांच अहम आग्रह:
- ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हर परिवार कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प ले।
- ‘जल है तो कल है’ के भाव के साथ तालाबों, पोखरों, अमृत सरोवरों, कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं स्वच्छता के लिए जनभागीदारी करें। घर, विद्यालय, ग्राम पंचायत और संस्थानों में वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन का रूप दें।
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा दें, जिससे परिवार, समाज और पूरा प्रदेश स्वस्थ रहेगा तथा टिकाऊ कृषि व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
- स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें। बरसात में स्वच्छता बनाए रखें और जलजनित व संक्रामक रोगों से बचाव के लिए पूरी सावधानी बरतें।
- आसपास जल जमाव न होने दें, कूड़े के ढेर न लगने दें और नालियों को प्लास्टिक से जाम होने से बचाएं।
अन्य सावधानियां:
मुख्यमंत्री ने आकाशीय बिजली से बचने की सलाह देते हुए कहा कि बिजली गिरने के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और पेड़ों के नीचे खड़े न हों। अतिवृष्टि में नदियों और जलाशयों के जल स्तर में अचानक वृद्धि हो सकती है, इसलिए स्नान करते समय विशेष सावधानी बरतें।सरकार ने सभी संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां कर ली हैं, फिर भी प्रदेशवासियों से सतर्क और सजग रहने की अपील की गई है।

