बंगाल चुनाव : TMC के गढ़ में ‘ममता’ को मां की चुनौती, 28 हजार मतों से पानीहाटी में रत्ना देबनाथ की जीत

कोलकाता, 4 मई। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के सोमवार को निकले नतीजों में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। एक तरफ जहां भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने की स्थिति में आ गई तो दूसरी तरफ टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को अपनी परंपरागत भवानीपुर सीट से भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हैवानियत की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां हैं रत्ना

बात यहीं तक सीमित नहीं रही वरन राज्य की सर्वाधिक चर्चित सीटों में एक पानीहाटी में भी टीएमसी की दुर्गति हो गई। उत्तर 24 परगना जिले में स्थित पानीहाटी विधानसभा सीट एक महत्वपूर्ण शहरी निर्वाचन क्षेत्र है, जो दमदम लोकसभा का हिस्सा है। यह पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का मजबूत गढ़ रहा था, जहां निर्मल घोष 2016 और 2021 में विजयी हुए थे।

रत्ना देबनाथ की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी

इस बार के चुनाव परिणाम में भाजपा ने रत्ना देबनाथ को उम्मीदवारी सौंपी और उनकी जीत का औपचारिक एलान ही किया जा रहा था। इस सीट से रत्ना देबनाथ ने टीएमसी के तीर्थांकर घोष को 28,836 मतों के अंतर से हरा दिया। रत्ना देबनाथ ने राजनीति में आना नहीं चुना था। वह अपने परिवार के साथ खुश थीं।

बंगाल चुनाव परिणाम पर एक नजर

लेकिन, आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में उनकी पुत्री के साथ जो हैवानियत हुई, उसने उनके लिए रास्ता बना दिया, जिसके जरिए वह पहले पानाहाटी पहुंचीं और अब विधानसभा भी जाने वाली हैं। कहने का मतलब है कि उन्होंने खुद को सिस्टम का हिस्सा बनाया, ताकि अपनी और दूसरों की भी बेटियों को न सिर्फ सुरक्षित वातावरण मिले बल्कि किसी के साथ अन्याय भी न हो।

रत्ना की उम्मीदवारी ने महिलाओं के दिल पर बड़ा प्रभाव डाला

जब भाजपा ने रत्ना देबनाथ को प्रत्याशी के रूप में फाइनल किया तो उसी समय से उनकी जीत तय मानी जा रही थी। रत्ना देबनाथ की इस चुनाव में उम्मीदवारी ने महिलाओं के दिल पर बड़ा प्रभाव डाला है। चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह से हर वर्ग की महिलाओं ने गले लगाकर आंसुओं की धारा बहाकर रत्ना का स्वागत कर इस लड़ाई में उनके साथ खड़ा होने का वादा किया, यह चुनाव में एक बड़ा फैक्टर साबित हुआ। इस बार किसी पार्टी का नहीं बल्कि एक मां होने के नाते महिलाओं ने एक मां का साथ देने का फैसला किया, जो चुनाव प्रचार में साफ दिख रहा था।

मेडिकल कॉलेज की घटना को भाजपा ने चुनाव प्रचार में जोर-शोर से उछाला था

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव प्रचार में आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में महिला जूनियर डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत की घटना को भाजपा ने जोरशोर से उठाया। चुनाव प्रचार के समय ही अलग-अलग पार्टी को सपोर्ट करने वाली महिलाओं ने एकजुट होकर इंसाफ की लड़ाई में रत्ना के साथ खड़ा होने का एलान किया। हर महिला ने ‘अभया’ को अपनी बेटी मानते हुए इस इंसाफ में खुद को रत्ना के साथ खड़ा कर दिया। वहीं, पीएम मोदी ने कहा कि सत्ता में आते ही आरजी कर समेत तमाम दुष्कर्म व महिलाओं के साथ अत्याचार की फाइलों को फिर से खोला जाएगा। इसका भी व्यापक असर जनमानस पर पड़ा।

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