SD Burman Birth Anniversary: जब बड़े कलाकारों के बजाय रूम बॉय से लेते थे धुन की राय, ऐसा था एसडी बर्मन का अंदाज

मुंबई, 1अक्टूबर । हिंदी सिनेमा के महान संगीतकार सचिन देव बर्मन को संगीत की दुनिया में एसडी बर्मन के नाम से जाना जाता है। उनकी धुनों में भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई के साथ लोक संगीत की सहज मिठास भी सुनाई देती थी। यही खासियत उनके संगीत को अपने दौर के दूसरे संगीतकारों से अलग पहचान देती थी।

एसडी बर्मन का जन्म 1 अक्टूबर 1906 को त्रिपुरा के शाही परिवार से जुड़े घराने में हुआ था। उनके परिवार में संगीत का माहौल था और बचपन से ही उन्हें संगीत की शिक्षा मिलने लगी। हालांकि, राजघराने की सुरक्षित जिंदगी चुनने के बजाय उन्होंने संगीत को अपना करियर बनाया। यही फैसला आगे चलकर उन्हें मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक ले गया।

शुरुआती दौर में झेलना पड़ा रिजेक्शन

फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सफर एसडी बर्मन के लिए आसान नहीं था। उनकी अलग संगीत शैली और आवाज को लेकर उन्हें शुरुआती दौर में कई बार अस्वीकृति का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी शैली से समझौता नहीं किया। 1940 के दशक में उन्हें फिल्मों में काम मिलने लगा। साल 1948 में रिलीज हुई फिल्म ‘दो भाई’ का गीत ‘मेरा सुंदर सपना बीत गया’ उनके शुरुआती यादगार गीतों में शामिल हुआ। इसके बाद ‘नौजवान’ और ‘जाल’ जैसी फिल्मों ने उनके संगीत को व्यापक पहचान दिलाई।

आम लोगों की राय को देते थे महत्व

एसडी बर्मन के काम करने का तरीका भी बेहद दिलचस्प था। उनकी जीवनी ‘एस.डी. बर्मन: द प्रिंस म्यूजिशियन’ में उनके काम से जुड़ा एक किस्सा मिलता है। लेखक अनिरुद्ध भट्टाचार्जी और बालाजी विट्ठल के मुताबिक, बर्मन अपनी बनाई धुनों पर प्रतिक्रिया जानने के लिए केवल बड़े कलाकारों या संगीतकारों पर निर्भर नहीं रहते थे। बताया जाता है कि वह कभी-कभी अपने रूम बॉय को भी धुन सुनाते और उसकी प्रतिक्रिया देखते थे। इसका मकसद यह समझना था कि उनकी बनाई धुन आम श्रोता के कानों को कैसी लग रही है।

लोक और शास्त्रीय संगीत का अनोखा मेल

एसडी बर्मन के लिए गीत के बोल, आवाज और संगीत के मूड के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण था। उनकी रचनाओं में बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के लोक संगीत की झलक भी दिखाई देती थी। उन्होंने अपनी इसी विशिष्ट शैली को फिल्मों में अपनाया और धीरे-धीरे उनकी अलग पहचान बन गई। आगे चलकर उन्होंने देव आनंद, गुरु दत्त, किशोर कुमार, लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया। ‘पेइंग गेस्ट’, ‘प्यासा’, ‘काला पानी’, ‘कागज के फूल’, ‘गाइड’, ‘आराधना’ और ‘अभिमान’ जैसी फिल्मों के संगीत ने उनकी लोकप्रियता को और मजबूत किया।

दो बार मिला फिल्मफेयर पुरस्कार

एसडी बर्मन को दो बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारतीय फिल्म संगीत में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है। लंबे समय तक संगीत की दुनिया में सक्रिय रहने के बाद 31 अक्टूबर 1975 को मुंबई में उनका निधन हो गया। हालांकि, उनकी बनाई धुनें आज भी हिंदी सिनेमा के संगीत इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

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