कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त अग्रिम जमानत, पुलिस के बुलावे पर दर्ज करानी होगी उपस्थिति
नई दिल्ली, 1 मई। सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां से जुड़े पासपोर्ट को लेकर दिए गए विवादित बयान से बुरी तरह फंसे कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है। एक दिन पहले (गुरुवार) को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है, आसानी से खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया है कि क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन केस नंबर 04/2026 में गिरफ्तारी की स्थिति में पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वह इस तथ्य से अवगत है कि दोनों पक्षों (खेड़ा और हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी) की ओर से आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं, लेकिन किसी की आजादी से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जमानत पर विचार करते समय जिन दस्तावेजों और तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उनका केस के अंतिम निर्णय से कोई संबंध नहीं है।
दरअसल, खेड़ा के खिलाफ यह मामला रिंकी भुइंया से जुड़े बयान को लेकर दर्ज किया गया था। खेड़ा ने रिंकी भुइयां सरमा पर आरोप लगाए थे कि उनके पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और विदेशों में संपत्तियां हैं।
जमानत की शर्तें
- खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा।
- जब भी पुलिस स्टेशन में बुलाया जाए, उपस्थित होना पड़ेगा।
- वह किसी भी तरह से सबूतों को प्रभावित या छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे।
- अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता बिना सक्षम न्यायालय की अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।
- साथ ही, ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार दिया गया है कि वह जरूरत के अनुसार अतिरिक्त शर्तें भी लागू कर सकता है।
- अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जमानत पर विचार करते समय जिन दस्तावेजों और तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उनका केस के अंतिम निर्णय से कोई संबंध नहीं है।
- ट्रायल कोर्ट इन टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही करेगा।
- निचली अदालत से नहीं मिली थी राहत
गौरतलब है कि पवन खेड़ा ने इससे पहले असम की निचली अदालत और गुवाहाटी हाई कोर्ट में भी अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। दोनों अदालतों से राहत न मिलने की वजह से वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। इससे पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने उन्हें एक हफ्ते की ट्रांजिट बेल दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए कांग्रेस नेता को अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया था।
