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CJI सूर्यकांत ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर सुनवाई से खुद को किया अलग

CJI सूर्यकांत ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर सुनवाई से खुद को किया अलग

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नई दिल्ली, 20 मार्च। भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार चयन समिति से प्रधान न्यायाधीश को हटाने संबंधी 2023 के एक कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई से खुद को यह कहते हुए अलग कर लिया है कि उन पर हितों के टकराव का आरोप लगाया जाएगा। इसमें हितों का टकराव है। अब यह मामला विचार-विमर्श के लिए एक नई पीठ को सौंप दिया जाएगा।

क्या है पूरा मामला

जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी पीठ में शामिल हैं। यह पीठ मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। यह सुनवाई इस आधार पर की जा रही है कि इस कानून ने प्रधान न्यायाधीश को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार चयन समिति से बाहर रखा है।

सीजेआई ने इसलिए लिया ये फैसला

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई ऐसी पीठ से करना उपयुक्त होगा, जिसमें कोई भी न्यायाधीश प्रधान न्यायाधीश बनने के क्रम में शामिल नहीं हों। याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रधान न्यायाधीश के इस विचार का समर्थन किया। उन्होंने सुझाव दिया कि पक्षपात की आशंका से बचने के लिए इस मामले को किसी ऐसी पीठ के समक्ष रखा जाए, जिसके सदस्य कोई भावी प्रधान न्यायाधीश न हों।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दिया ये सुझाव

प्रशांत भूषण ने कहा, ‘व्यक्तिगत रूप से मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे किसी ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सकता है, जिसके सदस्य कोई भावी प्रधान न्यायाधीश न हों।’ सुझाव को स्वीकार करते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि मामले को सात अप्रैल के लिए एक अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए और संकेत दिया कि नई पीठ में ऐसे न्यायाधीश शामिल होंगे, जो प्रधान न्यायाधीश का पद ग्रहण करने के क्रम में शामिल नहीं हैं।

कैसे होता है CEC-EC का चयन

दिसम्बर, 2023 में संसद की ओर से पारित यह कानून, सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के कुछ महीनों बाद आया, जिसमें शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता (या लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता) और प्रधान न्यायाधीश की सदस्यता वाली एक समिति करेगी। अदालत ने कहा था कि जब तक कोई नया कानून पारित नहीं हो जाता, यह व्यवस्था लागू रहेगी।

कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एडीआर ने दी है कानून को चुनौती

कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) सहित कई याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को चुनौती दी है। मार्च, 2023 में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने फैसला सुनाया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधान न्यायाधीश की सदस्यता वाली एक समिति के परामर्श पर की जाएगी।

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