लखनऊ, 9 अक्टूबर। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश या नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र और शुभ-अशुभ मुहूर्त की जानकारी ली जाती है। पंचांग हिंदू कालगणना की महत्वपूर्ण पद्धति है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की गणना की जाती है। आइए जानते हैं 9 अक्टूबर 2026 का पंचांग, जिसमें तिथि, सूर्योदय-सूर्यास्त, चंद्रोदय-चंद्रास्त, शुभ मुहूर्त और राहुकाल समेत दिन की महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं।
9 अक्टूबर 2026 की तिथि और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति
9 अक्टूबर, शुक्रवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 9:36 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। सूर्योदय सुबह 6:25 बजे और सूर्यास्त शाम 6:03 बजे होगा। वहीं चंद्रोदय तड़के 4:55 बजे और चंद्रास्त शाम 5:11 बजे होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में हस्त को 13वां नक्षत्र माना गया है। इसका अर्थ ‘हाथ’ होता है और इसके स्वामी चंद्रमा हैं। हस्त नक्षत्र कन्या राशि से संबंधित है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य के हस्त नक्षत्र में रहने का प्रभाव सभी राशियों पर देखने को मिल सकता है।
ब्रह्म योग
9 अक्टूबर को ब्रह्म योग रात 11:19 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में ब्रह्म योग को 27 नित्य योगों में 25वां और शुभ योग माना गया है। इसे ज्ञान, बुद्धि, सात्विकता और सकारात्मकता से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में किए गए शुभ कार्यों से सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना रहती है।
अभिजीत मुहूर्त
शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि इस समय शुभ कार्य करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। हालांकि, किसी भी कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहता है।
अमृतकाल
9 अक्टूबर को अमृतकाल दोपहर 2:07 बजे से 3:43 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृतकाल को शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, महत्वपूर्ण कार्यों और अन्य शुभ गतिविधियों को करना अनुकूल माना जाता है।
राहुकाल
शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, राहुकाल में किसी नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। हालांकि, पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है। राहुकाल का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।
गुलिक काल
इस दिन गुलिक काल सुबह 7:52 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। वहीं पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
यमगंड काल
शुक्रवार को यमगंड काल दोपहर 3:08 बजे से 4:35 बजे तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में इस समय को नए कार्य, महत्वपूर्ण यात्रा या अन्य शुभ शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है।
सूर्य और चंद्रमा का गोचर
इस दिन सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, कन्या राशि में सूर्य की स्थिति व्यक्ति को व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करने के लिए प्रेरित कर सकती है। वहीं चंद्रमा भी कन्या राशि में गोचर करेंगे। ज्योतिष में कन्या राशि के चंद्रमा को विश्लेषणात्मक, व्यवस्थित और संवेदनशील मानसिकता से जोड़कर देखा जाता है। इस दौरान व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर अधिक ध्यान दे सकता है।
दिशाशूल
शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा आवश्यक हो, तो कुछ परंपराओं में इससे जुड़े उपाय करने की मान्यता है।
डिस्क्लेमर: पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त से जुड़ी जानकारियां धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। स्थान के अनुसार पंचांग के समय में अंतर हो सकता है।


