एशियाई खेल : भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने खत्म किया पदक का सूखा, 49 किग्रा भार वर्ग में जीता रजत

नागोया, 23 सितम्बर। टोक्यो ओलम्पिक खेलों की रजत पदक विजेता भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने एशियाई खेलों में भी 12 वर्षों से चला रहा पदक का सूखा खत्म किया और बुधवार को यहां महिलाओं के 49 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीत लिया। इसके साथ ही एशियाई खेलों के 20वें संस्करण की भारत्तोलन स्पर्धा में भी भारत का खाता खुल गया है। हालांकि ओवरआल पदक तालिका में भारत 13वें स्थान पर पिछड़ा हुआ है।

1998 के बाद एशियाई खेलों की भारोत्तोलन स्पर्धा में देश को पहला पदक

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की 32 वर्षीय लिफ्टर मीराबाई ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम भार के साथ कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया। यह भारत का 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के कांस्य पदक जीतने के बाद एशियाई खेलों में भारोत्तोलन में पहला पदक है।

उत्तर कोरियाई री सोंग गम की विश्व रिकॉर्ड के साथ खिताबी हैट्रिक

वहीं उत्तर कोरिया की दो बार की विश्व चैम्पियन री सोंग गम ने उम्मीदों पर खरे उतरते हुए कुल 215 किलोग्राम (94 और 121 किलोग्राम) वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता और एशियाई खेलों में खिताबी हैट्रिक पूरी की। उन्होंने कुल वजन में विश्व रिकॉर्ड बनाया। इंडोनेशिया की लुलुक डायना त्रिविजयाना ने 191 किलोग्राम (88 और 103 किलोग्राम) भार के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

इस पदक के साथ मेरा जीवन पूर्ण हो गया : मीराबाई

मीराबाई ने बाद में कहा, ‘एशियाई खेलों में पदक जीतना सपना सच होने जैसा है। मैं पिछले 12 वर्षों यानी 2014 के एशियाई खेलों से ही इस पदक के लिए कोशिश कर रही थी। इस पदक के साथ मेरा जीवन पूर्ण हो गया है। अब मैं बहुत हल्का महसूस कर रही हूं। ये मेरे सपनों के एशियाई खेल हैं। जब से मैंने भारोत्तोलन में कदम रखा, तब से मेरा सपना एशियाई खेलों में पदक जीतना रहा है। एशियाई खेलों से पहले या उसके दौरान कुछ न कुछ होता रहा, लेकिन इस बार मैंने अपना सपना पूरा कर लिया।’

ओलम्पिक खेलों से लेकर विश्व चैम्पियनशिप तक बटोर चुकी हैं ख्याति

उल्लेखनीय है कि मीराबाई ने अब तक ओलम्पिक से लेकर विश्व चैम्पियनशिप तक में पदक जीते थे, लेकिन एशियाई खेलों में यह उपलब्धि हासिल नहीं कर पाई थीं। मीराबाई ने ओलम्पिक में रजत पदक, विश्व चैम्पियनशिप में एक स्वर्ण सहित तीन पदक तथा राष्ट्रमंडल खेलों और राष्ट्रमंडल चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक के अलावा एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता है।

मीराबाई ने 2014 में अपने पहले एशियाई खेलों में नौवां स्थान हासिल किया था। वह पीठ की चोट के कारण 2018 के एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाई थी जबकि पिछले एशियाई खेलों में वह चौथे स्थान पर रही थीं। अपनी मां के उपहार में दिए गए ओलम्पिक रिंग की तरह के सोने के झुमके पहने और बालों में तिरंगे का रिबन लगाए मीराबाई पदक जीतने के दृढ़ लक्ष्य के साथ मंच पर पहुंची।

चानू ने स्नैच में 83 किलोग्राम के साथ शुरुआत की और फिर अपने अगले दो प्रयासों में 85 किलोग्राम और 87 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता के पहले चरण में तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का भार उठाकर एशियाई खेलों में अपना पहला पदक जीता। रजत पदक पक्का होने के बाद उन्होंने अपना आखिरी प्रयास नहीं लिया।

अब 2028 के लॉस एंजेलिस ओलम्पिक में पदक जीतना अगला लक्ष्य

वस्तुतः मीराबाई यह पदक जीतने के लिए इतनी प्रतिबद्ध थीं कि पिछले महीने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के अगले दिन बाद ही वह अभ्यास में जुट गई थीं। अब उनका लक्ष्य 2028 में होने वाले ओलम्पिक खेलों में पदक जीतना होगा। उन्होंने कहा, ‘मैंने अब तक लॉस एंजेलिस ओलम्पिक के लिए अपनी रणनीति तय नहीं की है। क्वालिफिकेशन प्रक्रिया दिसम्बर में शुरू होगी। मैं कुछ समय तक इस पदक का जश्न मनाऊंगी और फिर फैसला करूंगी।’

पीएम मोदी ने चानू को दी बधाई

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीराबाई को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उनके ‘दृढ़ संकल्प और निरंतर अच्छा प्रदर्शन’ करने से देश की युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। पीएम मोदी ने X पोस्ट में कहा, ‘मीराबाई चानू के लिए एक विशेष रजत पदक। भारोत्तोलन में महिला 49 किलोग्राम वर्ग में पदक जीतने पर उन्हें हार्दिक बधाई। उनका दृढ़ संकल्प और निरंतरता पूरे देश को प्रेरित करती है। भारत को उन पर गर्व है। उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं।’

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