सफलता वही सार्थक है, जिसमें लोककल्याण की भावना सर्वोपरि हो : प्रधानमंत्री मोदी
नई दिल्ली, 7 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए विनम्रता, परोपकार और लोककल्याण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक समृद्धि वही है, जो समाज के हित और सेवा से जुड़ी हो। प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा, “समृद्धि की शोभा विनम्रता और परोपकार में निहित है। सफलता वही सार्थक है, जिसमें लोककल्याण की भावना सर्वोपरि हो।” इसके साथ उन्होंने यह संस्कृत श्लोक भी साझा किया—
भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैर्नवाम्बुभिर्दूरविलम्बिनो घनाः।
अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥
क्या है श्लोक का अर्थ?
इस श्लोक का भावार्थ है कि जैसे फल लगने पर वृक्ष झुक जाते हैं और जल से भरे बादल धरती की ओर आते हैं, उसी प्रकार सच्चे और परोपकारी लोग समृद्धि, सम्मान और सफलता मिलने के बाद भी अहंकार नहीं करते। वे विनम्र रहते हैं और अपना जीवन समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर देते हैं।
पहले भी साझा कर चुके हैं संस्कृत सुभाषित
प्रधानमंत्री मोदी हाल के दिनों में लगातार संस्कृत सुभाषितों के माध्यम से प्रेरणादायक संदेश दे रहे हैं। 6 जुलाई को उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा था कि उनका बलिदान भारत की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। इसके साथ उन्होंने यह श्लोक साझा किया था—
जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः कवीश्वराः।
नास्ति येषां यशःकाये जरामरणजं भयम्॥
इसका भावार्थ है कि समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले और बलिदान देने वाले महापुरुष अपने यश के कारण सदैव अमर रहते हैं। वहीं 3 जुलाई को अमरनाथ यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए भगवान अमरनाथ की स्तुति में एक संस्कृत श्लोक साझा किया था। उन्होंने कामना की थी कि बाबा बर्फानी का आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए।
