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Israel के प्रधानमंत्री Netanyahu का बयान और भारत

Israel के प्रधानमंत्री Netanyahu का बयान और भारत

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By Varsha Pargat

इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन Netanyahu उन्हें ईरान के युद्ध को लेकर एक बहुत बड़ी बात कही है.  वह कहते हैं “मैं युद्ध की कीमत जानता हूं .मैंने  युद्ध में अपने भाई को खोया है. मैंने आतंकवादियों से लड़ाई लड़ी है. और एक सैनिक को अपनी बाहों में मरते हुए भी देखा है. कभी-कभी युद्ध उन लोगों को रोकने के लिए आवश्यक होता है ,जो हमें नष्ट करना चाहते हैं. स्वतंत्रता अनमोल है और इसे बचाना जरूरी है”.

प्रधानमंत्री ने Netanyahu का यह स्टेटमेंट अगर हम सोचते हैं . भारत को सामने रखकर, उसका एनालिसिस कर सकते हैं. भारत स्वतंत्र होने के बाद से ही  आतंकवाद से लड़ते आ रहे हैं. आतंकवाद का दर्द हमने कई देशों को से सहा है. जिस तरह इजराइल आतंक से पीड़ित रहा है वैसे हम भी रहे हैं.

2014 से पहले तक हमने आतंक को झेला है, सहा है .और इतने जख्म दिए हैं, जो अभी भी ताजा लगते हैं. 26 /11 का मुंबई हमले या फिर कारगिल की लड़ाई हो, हमारे पड़ोसी देश ने Bleed India 1000 Times के पॉलिसी के तहत हमें बार-बार जख्म दिए हैं.

पाकिस्तान के साथ हमने 1947, 1965, 1971 और 1999 में युद्ध किये. इन सारे युद्ध में हमने पाकिस्तान को हराया. पाकिस्तान अच्छी तरह से जानता है कि भारत के सामने वह कुछ भी नहीं है. भारत के साथ  युद्ध लड़ना और जितना उसके लिए संभव है. परंतु भारत को हमेशा अस्थिर रखना, प्रगति में रोड़ा डालना और अपने जिहादी मकसद को पूरा करना, इस मकसद से पाकिस्तान हमारे साथ Proxy War करता आ रहा है.

Statement of Israeli Prime Minister Netanyahu and India

भारत के खिलाफ आतंकवादी संगठन खड़े किए और भारत को इन आतंकवादियों ने बार-बार खून के आंसू से रुलाया. 2014 से पहले जो तत्कालीन सरकार थी उन्होंने पाकिस्तान के साथ सख्त  नीति नहीं अपनाई . मुंबई में इतना बड़ा हमला हुआ पर हमने विरोध जताने के अलावा कुछ नहीं किया .इतना ही नहीं एक झूठा नॉरेटिव फैलाया .वह था “भगवा आतंकवाद”. लेकिन आज सभी को पता है कि कैसे षड्यंत्र रचा गया और कैसे हिंदुओं को बदनाम करने की एक साजिश की गई.

तुष्टिकरण की राजनीति ने भारत का हमेशा ही नुकसान किया है. Two Nation Theory गड़ी गई और भारत का विभाजन हुआ. विभाजन का नतीजा देखेंगे तो, कभी न मिटने वाला दर्द मिला .जिसके जख्म आज भी ताजा है. जो यह कहते थे कि “मेरी लाश पर भारत का विभाजन होगा”, उनका तो कुछ नहीं बिगड़ा. पर लाखों लाशों  पर भारत खंडित हुआ. दुनिया की सबसे बड़ी दर्दनाक त्रासदी है भारत का विभाजन.

धर्म के आधार पर भारत विभाजित हो तो गया ,लेकिन तत्कालीन सरकार और प्रधानमंत्री ने हिंदुओं की अपेक्षा की .तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देते रहे और आज उसके परिणाम हम सब भुगत  रहे हैं. बदलते हुए हालात और बदलती हुई डेमोग्राफी हमारे सामने एक बड़ा संकट है. जिसे हम सब समझ तो रहे हैं लेकिन उसको स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. “यह एक बड़ा नॉरेटिव है” यह मानकर हम बैठे हैं. हमारे अस्तित्व के ऊपर इतना बड़ा खतरा मंडरा रहा है जिसकी कल्पना करते हैं तो मन में सवाल उठता है, कि क्या भारत के फिर से खंडित होने के दिन आने वाले हैं?. इस सवाल के बारे में आप भी सोचिए आपके सामने आएगा पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और कई राज्य जहां तेजी से डेमोग्राफी बदल रही है. ऐसा कहा जाता है कि “Demography changes Destiny”.

नेतन्याहू ने कहा “कभी-कभी युद्ध उन लोगों को रोकने के लिए आवश्यक होता है जो हमें नष्ट करना चाहते हैं”. 2014 तक हमने पाकिस्तान के साथ सिर्फ बातचीत की लेकिन बाद में जब सरकार बदली तो हमने पाकिस्तान को सबक सिखाने का प्रयास किया. Uri Surgical Strike, Balakot Air Strike और ऑपरेशन सिंदूर उसका नतीजा है.

इसराइल हमेशा ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. उनको मालूम है कि उनके लिए दुनिया में कोई भी स्थान नहीं है. कोई दूसरा देश नहीं, जहां वह सुरक्षित रह सके.उनके पास बस वह छोटा सा जमीन का टुकड़ा है ,जिसे वह अपना स्वतंत्र देश मानते हैं “इजरायल”. उनके नसों नसों में यह बात दौड़ती है और सामान्य नागरिक भी इजरायल के लिए लड़ने के लिए सामने आता है.

भारत जहां हिंदू है, मेजोरिटी में है. हमारे लिए कोई और दूसरा देश नहीं है, जो हिंदू राष्ट्र कहलाएगा. एकमात्र देश है “हिंदुस्तान”. पर हमने हमारी नसों में यह नहीं भरा  की यह सिर्फ और सिर्फ एक ही राष्ट्र है, जहां हिंदू रह सकते हैं. हमने यह नहीं सीखा कि जो हमें नष्ट करना चाहते हैं उनके खिलाफ हमें लड़ना है, युद्ध करना है. पाकिस्तान इसी का फायदा उठाता रहा. लेकिन परिस्थिति बदली और ऑपरेशन सिंदूर में हमने पाकिस्तान को घुटनों पर लाया .इसीलिए हमने देखा कि कैसे पाकिस्तान आज गिड़गिड़ाता है. “भय बिन होती नहीं प्रीत” यह बात सच है. साथ-साथ यह भी सच है की स्वतंत्रता अनमोल है और इसे बचाना जरूरी होता है.

इसीलिए शायद भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने अपनी कविता में लिखा था

“नादाँ  पड़ोसी अपनी आंखें खोलो आजादी अनमोल है ना इसका मोल  लगाओ

पर तुम क्या जानो आजादी क्या होती है?

 तुम्हें मुफ्त में मिली ना कीमत गई चुकाई

 अंग्रेजों के बल पर दो टुकड़े पाए मां को खंडित करते तुम्हें लाज नई?”

और इसीलिए बेंजामिन Netanyahu का यह स्टेटमेंट हमें बहुत ही महत्वपूर्ण लगता है. क्योंकि उन्होंने जो कहा है वास्तविक वह हमारे देश को सामने रखते हुए सही लगता है. भारत 2.5 फ्रंट पर हमेशा से लड़ता आ रहा है और हमारे सामने कई सारे इंटरनल प्रॉब्लम्स भी है और इसीलिए हमको यह ध्यान में रखना पड़ेगा कि “जो लोग हमें नष्ट करना चाहते हैं उनके खिलाफ हमें न्याय की लड़ाई लड़नी पड़ेगी और हमारे संस्कृति में कहा जाता है

धर्म रक्षति रक्षिता”. 

यह लेख आपको कैसा लगा? हमें यहाँ बताएंvarshapargat@yahoo.co.in

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