रेखा गुप्ता ने दिल्ली की नौवीं मुख्यमंत्री के रूप में संभाली कमान, प्रवेश वर्मा सहित 6 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ

नई दिल्ली, 20 फरवरी। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की पूर्व अध्यक्ष और पहली बार विधायक निर्वाचित रेखा गुप्ता ने आज दिल्ली की नौवीं मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाल ली। ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में दिल्ली के उप राज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना ने 50 वर्षीया रेखा गुप्ता को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

रेखा गुप्ता ने हिन्दी में ईश्वर के नाम पर शपथ ली। उनके बाद छह अन्य विधायकों – प्रवेश वर्मा, आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा, कपिल मिश्रा, रविंदर इंद्राज सिंह और पंकज कुमार सिंह ने नई मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा की सत्ता में वापसी हो गई।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में रेखा गुप्ता शालीमार बाग से विधायक निर्वाचित हुई हैं। पिछले दो चुनावों – 2015 व 2020 में उन्हें आम आदमी पार्टी की वंदना कुमारी के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार उन्होंने बड़ी जीत से वंदना कुमारी से हिसाब बराबर कर दिया।

रेखा दरअसल, मदन लाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज के बाद दिल्ली में भाजपा की चौथी मुख्यमंत्री बनी हैं। इसके साथ ही वह, वर्तमान में भाजपा शासित किसी भी राज्य में एकमात्र महिला मुख्यमंत्री भी बन गई हैं।

पीएम मोदी सहित एनडीए के दिग्गज नेता शपथ समारोह में उपस्थित रहे

शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। इनके अलावा चंद्रबाबू नायडू, देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, अजीत पवार और पवन कल्याण सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री भी समारोह के साक्षी बने। रामलीला मैदान में कई गणमान्य हस्तियां और बड़ी संख्या में आम लोग भी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि बुधवार की शाम भाजपा विधायक दल की बैठक में रेखा गुप्ता को आठवीं दिल्ली विधानसभा में सदन का नेता चुना गया था। एलजी वीके सक्सेना ने कल ही देर शाम राज निवास में रेखा गुप्ता द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश किए जाने के बाद उन्हें नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 48 सीटों पर जीत हासिल की और आम आदमी पार्टी (आप) के एक दशक लंबे शासन का अंत किया था, जो 22 सीटें ही पा सकी थी। दिल्ली विधानसभा के लिए पांच फरवरी को चुनाव हुए थे और मतगणना आठ फरवरी को हुई थी।

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