मुंबई, 5 जुलाई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) का अनुमान 5 प्रतिशत रखा है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निकट अवधि में महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
उन्होंने बताया कि लगातार 16 महीनों तक आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रहने के बाद जून 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई। हालांकि पहली तिमाही की महंगाई आरबीआई के अनुमान से 30 आधार अंक कम रही, जिससे संकेत मिलता है कि इनपुट लागत का दबाव सीमित रहा।
- कोर महंगाई नियंत्रित, मांग का दबाव कम
आरबीआई के अनुसार, खाद्य और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद कोर महंगाई (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) मई और जून में 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रही। वहीं, कीमती धातुओं को छोड़कर कोर महंगाई 2.3 से 2.5 प्रतिशत के बीच रही, जो यह दर्शाती है कि मांग आधारित महंगाई का दबाव अभी भी सीमित है।
- अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। घरेलू मांग, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की निरंतर गतिविधियां, निवेश में तेजी और मजबूत निर्यात आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं।
- तिमाहीवार महंगाई का अनुमान
आरबीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में:
दूसरी तिमाही: 4.7%
तीसरी तिमाही: 5.9%
चौथी तिमाही: 5.5%
जबकि वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- महंगाई पर बने हुए हैं ये बड़े जोखिम
आरबीआई ने कहा कि महंगाई के अनुमान पर कई जोखिम बने हुए हैं। इनमें अल-नीनो का मानसून पर प्रभाव, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख हैं। इन कारकों के चलते आने वाले महीनों में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

