श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े बदलाव की तैयारी : 11 जुलाई की बैठक में नए महासचिव पर फैसला संभव

अयोध्या, 27 जून। दो दिनों से जारी अटकलों पर अंततः शनिवार को पूर्ण विराम लग गया, जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने इसकी पुष्टि कर दी। इसके बाद अब लखनऊ से अयोध्या तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में जल्द ही बड़ा बदलाव किए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

चंपत राय व अनिल मिश्र के इस्तीफों के बाद अब ट्रस्ट में 3 पद खाली

बताया जा रहा है कि ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों के पहले से ही रिक्त एक ट्रस्टी पद को मिलाकर अब ट्रस्ट के तीन महत्वपूर्ण पद खाली हो गए हैं। ऐसे में अब जल्दी ही ट्रस्ट के स्वरूप को बदलने की पहल सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देकर की जाएगी ताकि राम मंदिर के निर्माण और मंदिर के कामकाज तथा चढ़ावे की देखभाल का कार्य पारदर्शी तरीके से किया जा सके।

बताया जा रहा है कि जब से श्रीराम जन्मभूमि निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने यह सुझाव दिया है कि मंदिर का मौजूदा प्रबंधन ढांचा बदलकर अनुभवी लोगों को जिम्मेदारी सौंपने की जरूरत है, उसके बाद से ही यह चर्चा शुरू हो गई है कि जल्द ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा बदलाव किया जाएगा और उसका पुनर्गठन किया जाएगा।

कानूनी मामलों के जानकार लोगों का कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में फरवरी, 2020 को किया था, इसलिए ट्रस्ट को भंग करना या उसकी जगह नई व्यवस्था लागू करना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं होगा। इसके लिए केंद्र सरकार को विधिक प्रक्रिया अपनानी होगी।

आवश्यकता पड़ने पर नई अधिसूचना अथवा अन्य वैधानिक प्रावधान करने पड़ सकते हैं। इस प्रक्रिया के बारे में केंद्र सरकार और ट्रस्ट के पदाधिकारी भी अवगत हैं और जब से मंदिर के चढ़ावा चोरी किए जाने की जानकारी सार्वजनिक हुई है, सभी यह चाहते हैं कि ट्रस्ट के ढांचे को बेहतर किया जाए ताकि इस तरह ही घटना दोबारा न होने पाए।

जल्द होगा श्रीराम मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन

लोगों का कहना है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास हैं। वह धर्म-कर्म के कार्य में व्यस्त रहते हैं और उनका स्वास्थ्य भी बेहतर नहीं रहता। ऐसे में ट्रस्ट के दैनिक प्रशासनिक संचालन और अधिकतर महत्वपूर्ण निर्णयों की जिम्मेदारी महासचिव चंपत राय संभालते रहे हैं जबकि ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्र भी ट्रस्ट के प्रमुख निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

अब दोनों के ही पद रिक्त हो गए हैं। ऐसे में ट्रस्ट के संचालन का मौजूदा संतुलन प्रभावित न हो, इसके लिए जल्द ही कोई व्यवस्था करनी होगी। यानी ट्रस्ट के रिक्त पदों को भरने के साथ ही ट्रस्ट के संचालन में कोई विवाद न हो, इसके लिए ट्रस्ट के प्रबंधन ढांचा को बदलकर उसमें अनुभवी लोगों को लाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

यह अब इसलिए भी जरूरी है कि राम मंदिर में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का चढ़ावा आ रहा है। हजारों श्रद्धालु रोज मंदिर आते हैं, उनका प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, निर्माण कार्य, खरीद, लेखा और मानव संसाधन जैसे कार्यों पर अब लगातार नजर रखना जरूरी हो गया है। ऐसे में जवाबदेही, पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी को और मजबूत करने के लिए प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की जरूरत है।

ट्रस्ट के गठन के साथ ही CEO की तैनाती की जाएगी

इसे ध्यान में रखते हुए ही यह कहा जा रहा है कि श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन के साथ भविष्य में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर धाम, तिरुपति और माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर अधिक पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था अयोध्या में लागू करने पर विचार-विमर्श दिल्ली में होने लगा है। जल्द ही श्रीराम मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन कर वहां मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की तैनाती जाएगी। यह सारा कार्य सुप्रीम कोर्ट की जानकारी में लाकर केंद्र सरकार जल्द ही करेगी।

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