लखनऊ, 14 सितम्बर। समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिली, जब डॉ. राममनोहर लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी अखिलेश यादव को सर्वानुमति से सौंप दी गई। अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव ने वर्ष 2017 से इस ट्रस्ट की कमान संभाल रखी थी। फिलहाल ट्रस्ट की हालिया बैठक में सभी आठ सदस्यों ने इस बड़े बदलाव पर अपनी मुहर लगा दी।
समाजवादी पार्टी की पूरी विरासत अब अखिलेश के हाथ
ट्रस्ट की बैठक में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के अलावा आदित्य यादव और वीरपाल यादव समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। इस फैसले के साथ ही अब पार्टी संगठन के अलावा लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट, दोनों की पूरी कमान अखिलेश यादव के पास आ गई है।
डॉ. लोहिया के विचारों को ‘जेन जी‘ तक पहुंचाने के लिए नई विंग भी बनाई जाएगी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले लिया गया यह फैसला बेहद अहम है। अब ट्रस्ट के माध्यम से डॉ. लोहिया के विचारों को ‘जेन जी’ तक पहुंचाने के लिए एक नई विंग भी बनाई जाएगी।
विक्रमादित्य मार्ग और लोहिया ट्रस्ट का पुराना रिश्ता
लखनऊ का विक्रमादित्य मार्ग लंबे समय तक समाजवादी राजनीति की धड़कन माना जाता रहा है। यहीं समाजवादी पार्टी का प्रदेश मुख्यालय, मुलायम सिंह यादव का आवास और लोहिया ट्रस्ट का दफ्तर एक साथ मौजूद था। लोहिया ट्रस्ट का लखनऊ कार्यालय करीब 1990 से बंगला नंबर-1 में चल रहा था। समय के साथ यह जगह समाजवादी नेताओं की बैठकों, डिजिटल आईटी सेल और विचारधारा के प्रचार-प्रसार का मुख्य केंद्र बन गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खाली हुआ था दफ्तर
सितम्बर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य संपत्ति विभाग ने बंगला नंबर-1 को खाली कराकर अपने कब्जे में ले लिया था। सरकारी बंगला खाली होने के बाद भी लोहिया ट्रस्ट एक संस्था के रूप में लगातार सक्रिय बना रहा।
लोहिया ट्रस्ट को पुरानी समाजवादी व्यवस्था और मुलायम सिंह यादव के दौर का प्रतीक माना जाता है। अब इस फैसले के साथ ही संगठन से लेकर वैचारिक विरासत तक की पूरी कमान औपचारिक रूप से अखिलेश यादव के पास आ गई है।


