1. Home
  2. हिन्दी
  3. राष्ट्रीय
  4. NCERT की नई किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल का अध्याय, कक्षा 9 के छात्र पढ़ेंगे लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक
NCERT की नई किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल का अध्याय, कक्षा 9 के छात्र पढ़ेंगे लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक

NCERT की नई किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल का अध्याय, कक्षा 9 के छात्र पढ़ेंगे लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक

0
Social Share

नई दिल्ली, 25 जून। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में पहली बार 1975 के आपातकाल को विस्तार से शामिल किया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ नामक पुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया गया है। एनसीईआरटी अधिकारियों के अनुसार, अब कक्षा 9 के विद्यार्थियों को आपातकाल के इतिहास, उसके कारणों और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़े प्रभावों की विस्तृत जानकारी मिलेगी। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब देश में लगाए गए आपातकाल के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

पुस्तक में लोकतंत्र की उपलब्धियों और चुनौतियों पर आधारित अध्याय के तहत बताया गया है कि 1970 के दशक में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और शासन व्यवस्था को लेकर जनता में असंतोष बढ़ रहा था। इसी पृष्ठभूमि में जून 1975 में ‘आंतरिक अशांति’ के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया। नई किताब के अनुसार, आपातकाल के दौरान करीब 21 महीने तक कई संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए। प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और कई विपक्षी नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक प्रभाव पड़ा।

पाठ्यपुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है। इसमें उल्लेख है कि उन्होंने छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों को संगठित कर आपातकाल के खिलाफ आंदोलन चलाया। विशेष रूप से बिहार और गुजरात में हुए आंदोलनों ने लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को मजबूत बनाया। किताब में यह भी बताया गया है कि 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनावों ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को प्रदर्शित किया। मतदाताओं ने अपने मतदान अधिकार का प्रयोग कर राजनीतिक परिवर्तन का रास्ता प्रशस्त किया।

इसके अलावा नई पाठ्यपुस्तक में लोकतंत्र के समक्ष मौजूद वर्तमान चुनौतियों जैसे फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएं, गरीबी, सामाजिक भेदभाव, क्षेत्रीय असमानता और लैंगिक विषमता पर भी चर्चा की गई है। छात्रों को लोकतांत्रिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता से परिचित कराने के लिए ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नामक नया खंड भी जोड़ा गया है। पुस्तक में मीडिया की भूमिका, मतदान प्रक्रिया, मतदाता भागीदारी, पंचायत व्यवस्था, महिलाओं के मतदान अधिकार और स्थानीय निकायों में आरक्षण जैसे विषयों को भी विस्तार से शामिल किया गया है, ताकि छात्र लोकतांत्रिक व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझ सकें।

Join our WhatsApp Channel

And stay informed with the latest news and updates.

Join Now
revoi whats app qr code