पूर्व क्षेत्र ने तीसरी बार जीती दलीप ट्रॉफी, दक्षिण क्षेत्र को पहली पारी की बढ़त के आधार पर दी शिकस्त

चेन्नई, 10 सितम्बर। प्रतिष्ठित दलीप ट्रॉफी में पूर्व क्षेत्र की तीसरी खिताबी जीत तो फाइनल के चौथे दिन पहले ही सत्र में तय हो गई थी, जब रनों के पहाड़ (708 रन) के सामने दक्षिण क्षेत्र पहली पारी में 372 रनों की लीड खा बैठा था। फिलहाल मेहमानों ने मेजबानों को फॉलोऑन पर बाध्य न कर दूसरी पारी में खुद बल्लेबाजी अभ्यास को तरजीह दी।

अंततः पांचवें व अंतिम दिन गुरुवार को कप्तान ईशान किशन ने जब चाय के तनिक पहले सात विकेट पर 388 रन बनाकर दूसरी पारी घोषित की 760 रनों के भारी भरकम लक्ष्य के सामने दो घंटे से तनिक ज्यादा समय में दक्षिण की दूसरी पारी का कोई अर्थ नहीं था। इसके साथ ही मुकाबला ड्रॉ घोषित कर दिया गया और पूर्व क्षेत्र ने पहली पारी की विशालकाय बढ़त के आधार पर उपाधि जीतने की औपचारिकता पूरी कर ली।

पूर्व ने चेपॉक में ही 13 वर्ष पहले दूसरी बार जीती थी ट्रॉफी

दिलचस्प यह है 13 वर्ष पहले (सत्र 2012-13) भी पूर्व क्षेत्र ने यहीं चेपॉक के एमए चिदांबरम स्टेडियम में ही दूसरी बार ट्रॉफी जीती थी, जब उसने मध्य क्षेत्र को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराया था। उसके ठीक वर्ष पहले (सत्र 2011-12) पूर्व ने मध्य क्षेत्र के ही इंदौर में एक पारी व 20 रनों से हराकर पहली बार सर्वजेता का गौरव अर्जित किया था।

कोनैन कुरेशी भी ने भी ठोका शतक, अनुकल संग शतकीय भागीदारी

मुकाबले के अंतिम दिन का उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि मोहम्मद कोनैन कुरेशी भी मैच में शतक बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए। उन्होंने नाबाद 116 रन (190 गेंद, तीन छक्के, 14 चौके) बनाए, जो उनके केवल दो मैच पुराने प्रथम श्रेणी करिअर का पहला शतक रहा। कुरेशी ने अनुकूल रॉय (64 रन, 112 गेंद, दो छक्के, चार चौके) के साथ सातवें विकेट के लिए 150 रनों की साझेदारी भी की।

दूसरी पारी में भी दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाज असर नहीं छोड़ सके

देखा जाए तो पूर्व क्षेत्र ने दूसरी पारी में भी दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों को असहाय साबित किया। पिछली शाम के स्कोर 5-212 से आगे बढ़े मेहमान बल्लेबाजों पहली पारी की ही भांति दिशाहीन गेंदबाजी कर रहे दक्षिण के गेंदबाज अधिक परेशान नहीं कर पाए। अनुभवी मोहम्मद सिराज (1-47) कुछ समय के लिए पूरे जोश, तेजी और आक्रामकता के साथ गेंदबाजी करने आए। व्यक्तिगत रूप से उनका प्रयास संतोषजनक रहा, लेकिन टीम के लिहाज से वह बेअसर साबित हुए। सिराज को दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला और दक्षिण क्षेत्र का कमजोर बल्लेबाजी प्रदर्शन भी उसके टीम चयन की खामियों को उजागर करता है।

स्कोर कार्ड

‘प्लेयर ऑफ द मैच’ कप्तान ईशान किशन की बात करें तो उन्होंने पहली पारी में शानदार 270 रन बनाकर लाल गेंद की क्रिकेट में अपनी तैयारी का मजबूत संकेत दिया। वहीं अपने 100वें प्रथम श्रेणी मैच में खेल रहे अनुभवी मोहम्मद शमी ने भी जुझारू प्रदर्शन करते हुए कुछ युवा खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया। कुमार कुशाग्र ने दूसरी पारी में छठा प्रथम श्रेणी शतक लगाया जबकि झारखंड के उनके साथी शिखर मोहन ने दोनों पारियों में तकनीक और संयम से भरी शानदार अर्धशतकीय पारियां खेलीं।

ईशान किशन बोले – ‘हम जानते थे कि मूल रूप से यह पहली पारी का मुकाबला है’

साथी खिलाड़ियों के साथ ट्रॉफी उठाकर जश्न मनाने वाले किशन ने अपनी रणनीति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि जब आप टीम के कप्तान होते हैं तो सबसे पहली चीज परिस्थितियों को समझना होती है। हमने लगभग दो दिन बल्लेबाजी की। अब एक इकाई के तौर पर हम जानते थे कि मूल रूप से यह पहली पारी का मुकाबला है।’

तपती गर्मी में गेंदबाजों को दोबारा थकाना नहीं चाहते थे किशन

किशन ने कहा, ‘इसलिए हमारा मुख्य काम उन 10 विकेट को चटकाना और बढ़त हासिल करना था। अगर हमारे पास पहली पारी की बढ़त (खिताब जीतने के लिए पर्याप्त) है तो मैं इस तपती गर्मी में दोबारा मैदान पर क्यों उतरना चाहूंगा?’ उनके इस बयान ने घरेलू नॉकआउट मुकाबलों को पांच दिन तक खींचकर नतीजा हासिल करने के उद्देश्य और सिर्फ पहली पारी में बढ़त लेकर खिताब जीतने की रणनीति के बीच के विरोधाभास को उजागर किया।

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