लखनऊ, 29 सितंबर। भारतीय रसोई में दालचीनी का इस्तेमाल खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। हालांकि, यह सिर्फ एक मसाला नहीं है। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में दालचीनी का इस्तेमाल लंबे समय से विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। दालचीनी की सुगंधित छाल को सुखाकर मसाले के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। दालचीनी एक सदाबहार पेड़ है, जिसकी ऊंचाई करीब 15 से 20 मीटर तक हो सकती है। श्रीलंका को दालचीनी का प्रमुख मूल क्षेत्र माना जाता है। भारत में भी केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के पश्चिमी घाट क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है।
पाचन के लिए उपयोगी मानी जाती है दालचीनी
आयुर्वेद में दालचीनी को गर्म तासीर वाला माना जाता है। पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल पाचन तंत्र को बेहतर रखने के लिए किया जाता रहा है। गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी दालचीनी के सेवन की परंपरा रही है। माना जाता है कि यह पाचक रसों के स्राव में मदद कर सकती है।
एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर
दालचीनी में पॉलीफेनोल समेत कई एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से दालचीनी को संतुलित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाने को लेकर भी रुचि रहती है।
सूजन और जोड़ों के दर्द में पारंपरिक इस्तेमाल
दालचीनी का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों से जुड़ी परेशानी में भी किया जाता रहा है। इसके कुछ यौगिकों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। पारंपरिक तौर पर दालचीनी का उपयोग तेल या लेप के रूप में भी किया जाता है।
सर्दी-जुकाम में भी लोकप्रिय
सर्दी, खांसी और मौसम बदलने के दौरान दालचीनी का काढ़ा या शहद के साथ इसका सेवन घरेलू नुस्खे के तौर पर काफी लोकप्रिय है। इसकी गर्म तासीर के कारण इसे शरीर को गर्म रखने और सर्दी-जुकाम में राहत के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।
चाय से लेकर बिरयानी तक में इस्तेमाल
दालचीनी भारतीय रसोई में कई तरह के व्यंजनों का हिस्सा है। पुलाव, बिरयानी, चाय, कहवा और मिठाइयों में इसका इस्तेमाल स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में इसे त्रिदोष से जुड़ी अवधारणाओं के संदर्भ में भी इस्तेमाल किया जाता है और विशेष रूप से वात और कफ को संतुलित करने के लिए इसका उल्लेख मिलता है।
सीमित मात्रा में करें सेवन
दालचीनी के कई पारंपरिक उपयोग और संभावित स्वास्थ्य लाभ बताए जाते हैं, लेकिन इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में या लंबे समय तक सेवन करने से नुकसान भी हो सकता है। किसी बीमारी के इलाज के लिए दालचीनी को दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। विशेष स्वास्थ्य स्थिति, दवाओं के सेवन या नियमित सप्लीमेंट उपयोग की स्थिति में डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।


