नई दिल्ली, 4 सितम्बर। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने भाजपा की अगुआई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। पार्टी का आरोप है कि सरकार सामाजिक सद्भाव को कमजोर कर रही है, लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचा रही है और ऐसी नीतियां अपना रही है, जिनका मजदूरों, किसानों, युवाओं, छात्रों और समाज के अन्य वर्गों पर बुरा असर पड़ा है।
एक से तीन दिसम्बर तक ‘जेल भरो आंदोलन’
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सीपीआई की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक के दौरान केंद्र के खिलाफ प्रस्तावित देशव्यापी अभियान का निर्णय लिया गया। सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने कहा कि पार्टी दो अक्टूबर को ‘सांप्रदायिक सद्भाव दिवस’ और सात नवम्बर को ‘क्रांति दिवस’ मनाएगी। इसके बाद एक से तीन दिसम्बर तक तीन दिन का ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू किया जाएगा।
डी. राजा ने कहा कि पार्टी ने दिसम्बर के आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी देने के लिए कम से कम पांच लाख पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा, ‘इस आंदोलन में मजदूरों, किसानों, युवाओं, छात्रों, महिलाओं और समाज के अन्य वर्गों से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा और बुनियादी नीतियों व नीतिगत बदलाव की मांग को तेज किया जाएगा।’
सीपीआई नेता ने पार्टी के हालिया ‘बदलाव जरूरी है’ अभियान से बने माहौल को और आगे बढ़ाने की कोशिश भी की। दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई उक्त रैली का जिक्र करते हुए राजा ने दावा किया कि लोगों की यह भारी भागीदारी राजनीतिक माहौल में बदलाव और नरेंद्र मोदी सरकार के प्रति जनता की बढ़ती नाराजगी को दिखाती है।
अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार पैदा करने के मामले में मोदी सरकार नाकाम
राजा के अनुसार, समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग अब यह समझने लगे हैं कि अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार पैदा करने के मामले में मोदी सरकार नाकाम रही है उन्होंने कहा कि सीपीआई के अभियान ने ऐसे समूहों को एक साथ लाया है, जो अलग-अलग चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन सरकार से ‘निराश’ होने की भावना उनमें एक जैसी है।
‘लामबंदी अभियान’ में रुकावट डालने की कोशिश का भी आरोप
सीपीआई ने केंद्र सरकार पर उसके लामबंदी अभियान (लोगों को एकजुट करने के अभियान) में रुकावट डालने की कोशिश का भी आरोप लगाया। राजा ने आरोप लगाया कि पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को रोकने की कोशिशें सरकार की बढ़ती हुई विपक्ष से घबराहट को दिखाती हैं। पार्टी की राष्ट्रीय परिषद ने सरकार द्वारा आलोचकों को निशाना बनाने के लिए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल की भी आलोचना की और इस रणनीति को ‘उल्टा असर करने वाला और बेकार’ बताया।
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार को 100 दिनों में जनता की बढ़ती नाराजगी का सामना करना पड़ रहा
पश्चिम बंगाल के बारे में राजा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को अपने कार्यकाल के शुरुआती 100 दिनों में ही जनता की बढ़ती नाराजगी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर विपक्षी दलों को निशाना बनाने और समाज के कुछ वर्गों को बांटने वाली सोच के आधार पर एकजुट करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
भाजपा के खिलाफ व्यापक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक विकल्प की वकालत
डी राजा ने भाजपा के खिलाफ एक व्यापक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक विकल्प की भी वकालत की और कहा कि राज्यों में ऐसे विकल्प की जरूरत महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘हम लोगों के पास जाएंगे और धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक दलों से भी संपर्क करेंगे।
चुनाव के मद्देनजर I.N.D.I.A. में शामिल दलों से सीट-बंटवारे पर बातचीत शुरू करने की अपील
चूंकि अगले वर्ष कई राज्यों में चुनाव होने हैं, लिहाजा राजा ने विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. में शामिल दलों से सीट-बंटवारे पर जल्द और दोस्ताना तरीके से बातचीत शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों में सीट-बंटवारे को लेकर मतभेद बार-बार विपक्षी दलों के लिए एक बड़ी बाधा बनकर उभरे हैं। उन्होंने साथ ही भाजपा के खिलाफ एक प्रभावी चुनावी विकल्प बनाने के लिए बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया।
हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ हवन को लेकर भी भाजपा सरकार की तीखी आलोचना
हल्द्वानी की घटना का जिक्र करते हुए राजा ने भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, ‘शुद्धिकरण कार्यक्रम करने वाला समूह भाजपा-आरएसएस से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के किसी भी शीर्ष नेता ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा और न ही किसी आरोपित को गिरफ्तार किया गया जबकि उन्होंने उस जगह का शुद्धिकरण किया था, जहां से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रैली को संबोधित किया था।
गौरतलब है कि गत 10 अगस्त को दक्षिणपंथी समूह ‘श्री राम सेना’ ने कथित तौर पर हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई रैली वाली जगह पर ‘शुद्धिकरण’ हवन किया था। इससे दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उसी जगह से ‘विजय शंखनाद’ रैली को संबोधित किया था। बाद में खरगे ने कहा कि ‘मंच की शुद्धि’ से उन्हें छुआछूत की चुभन महसूस हुई और उन्हें अपमानित होना पड़ा।


