लखनऊ, 16 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां कात्यायनी की आराधना के अवसर पर प्रदेश की नारी शक्ति के साहस, संकल्प और पराक्रम को नमन किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की बेटियां खेलों सहित विभिन्न क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।
2017 से पहले और अब के यूपी में बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी। भय और अराजकता के माहौल के कारण बेटियों के लिए आगे बढ़ने के अवसर सीमित थे। खेल के मैदानों पर भी अवैध कब्जों और माफिया के प्रभाव की समस्या थी। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में प्रदेश में सुरक्षा और खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया गया है, जिससे बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक अवसर मिल रहे हैं।
गांव से मंडल स्तर तक बढ़ीं खेल सुविधाएं
प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए गांव, जिला और मंडल स्तर पर खेल सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है। मेरठ में निर्माणाधीन मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय को भी खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार की ओर से ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में अवसर देने का प्रावधान भी है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक रहीं यूपी की बेटियां
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की उन महिला खिलाड़ियों का उल्लेख किया, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से देश और उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। एथलेटिक्स में पारुल चौधरी, प्रियंका गोस्वामी, अन्नू रानी और प्राची चौधरी ने अपनी पहचान बनाई है। वहीं, जूडो में अस्मिता डे, क्रिकेट में दीप्ति शर्मा और मेघना सिंह, हॉकी में वंदना कटारिया तथा कुश्ती में दिव्या काकरान ने भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
मुख्यमंत्री के संदेश का मुख्य जोर बेटियों को सुरक्षित माहौल, बेहतर खेल सुविधाएं और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर रहा। प्रदेश की महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि उचित प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और अवसर मिलने पर बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकती हैं।


