ब्रिटेन भी ईरान पर हमला करने को तैयार : परमाणु सबमरीन को अरब सागर में किया तैनात
लंदन, 22 मार्च। अमेरिका व इजराइल के अलावा खाड़ी देशों पर ईरान के लगातार हमलों का जवाब देने के लिए ब्रिटेन ने भी अपनी एक न्यूक्लियर पावर वाली रॉयल नेवी सबमरीन अरब सागर में तैनात कर दी है, जो ईरान पर क्रूज मिसाइल से हमला करने में सक्षम है। ब्रिटिश मीडिया ने सैन्य सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
डेली मेल ने बताया कि सबमरीन, एचएमएस एनसन में टॉमहॉक ब्लॉक IV लैंड-अटैक मिसाइलें और स्पीयरफिश हेवीवेट टॉरपीडो लगे हैं और माना जा रहा है कि यह उत्तरी अरब सागर के गहरे पानी में है। इसका मतलब है कि अगर लड़ाई बढ़ती है तो ब्रिटिश सेना के पास ईरान पर हमला करने की क्षमता है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, यदि ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर से इजाजत मिलती है, तो एचएमएस एनसन को फायर करने का आदेश दिया जाएगा और यह सतह के करीब जाकर चार मिसाइलें दागेगा।
डाउनिंग स्ट्रीट के एक बयान के अनुसार, शुक्रवार को ब्रिटेन ने अमेरिका को ब्रिटिश बेस का इस्तेमाल करने की इजाजत देने पर सहमति जताई थी ताकि ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल की जा रही मिसाइल साइट्स और क्षमताओं को नष्ट किया जा सके। बयान में कहा गया कि ब्रिटेन होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को सुरक्षित रखने के लिए योजना बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ काम कर रहा है। इस कदम के बावजूद बयान में जोर दिया गया कि ब्रिटेन बड़े झगड़े में नहीं पड़ना चाहता है।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने ब्रिटेन को दी चेतावनी
वहीं समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अपने ब्रिटिश समकक्ष यवेट कूपर को ईरान के खिलाफ अमेरिका व इजराइल के हमले में कोई भी मदद न करने की चेतावनी दी और कहा कि इस तरह की मदद से तनाव और बढ़ेगा।
अराघची ने बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ‘ज्यादातर ब्रिटिश लोग ईरान पर इजराइल-अमेरिका की अपनी पसंद की लड़ाई में कोई हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं। अपने ही लोगों को नजरअंदाज करके, स्टार्मर ब्रिटेन बेस को ईरान के खिलाफ हमले के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत देकर ब्रिटिश लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं। ईरान अपनी सुरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा।’
हालांकि ब्रिटेन ने ईरानी विदेश मंत्री के बयान का तीव्र विरोध किया है। उसी बातचीत में कूपर ने ईरान को ‘ब्रिटेन के बेस, इलाके या हितों’ को टारगेट करने के खिलाफ चेतावनी दी और आगे तनाव बढ़ने के खतरे पर जोर दिया।
बीते दिनों ईरान ने डिएगो गार्सिया की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं थीं
बीते दिनों ईरान ने डिएगो गार्सिया की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। इसकी वजह से यह तनाव और बढ़ गया। डिएगो गार्सिया हिन्द महासागर में अमेरिका-ब्रिटेन का रणनीतिक रूप से खास संयुक्त बेस है। हालांकि, ईरान की ओर से दागी गई दोनों में से कोई भी मिसाइल अपने टारगेट पर नहीं लगी। एक कथित तौर पर उड़ान के बीच में फेल हो गई, जबकि दूसरी को अमेरिकी नेवल इंटरसेप्टर ने निशाना बनाया।
हालांकि यह साफ नहीं है कि ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक नष्ट किया गया था या नहीं। लेकिन इस हमले की कोशिश ने ईरान की मिसाइल क्षमताओं को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि डिएगो गार्सिया ईरानी इलाके से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर है, जिससे पहले के अंदाजे से ज्यादा रेंज होने का संकेत मिलता है। यह बेस इलाके की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है, जिसमें अमेरिकी बॉम्बर, न्यूक्लियर सबमरीन और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं।
