बंगाल चुनाव से पहले ED ने I-PAC के निदेशक ऋषि राज सिंह को भेजा समन, सोमवार को दिल्ली में होगी पेशी
कोलकाता, 19 अप्रैल। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने वाली राजनीतिक सलाहकार कम्पनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के खिलाफ अपनी जांच तेज कर दी है और हवाला लेनदेन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में I-PAC के निदेशक ऋषि राज सिंह को पूछताछ के लिए तलब किया है। ऋषि राज को सोमवार (20 अप्रैल) को दिल्ली स्थित ईडी दफ्तर में पेश होने के लिए समन भेजा गया है।
इसी माह ऋषि राज के बेंगलुरु आवास पर की गई थी छापेमारी
उल्लेखनीय है कि 2015 में स्थापित I-PAC तीन संस्थापक निदेशकों में ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन शामिल हैं। ईडी ने हाल ही में विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया था, जो वर्तमान में एजेंसी की हिरासत में है। ऋषि राज सिंह का बयान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज किया जाएगा। इससे पहले 2 अप्रैल को ईडी ने बेंगलुरु में उनके ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।

खातों में हेरफेर करने और निदेशकों के जरिए बेहिसाब धन के लेन-देन का आरोप
यह पूरी जांच दिल्ली पुलिस की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें I-PAC पर खातों में हेरफेर करने और निदेशकों के जरिए बेहिसाब धन के लेन-देन का आरोप लगाया गया है। ईडी का दावा है कि I-PAC ने लगभग 50 करोड़ रुपये की ‘अपराध की कमाई’ को ठिकाने लगाने में भूमिका निभाई है।
जांच एजेंसी ने वित्तीय गड़बड़ियों के कई तरीके उजागर किए हैं, जिनमें राजनीतिक दलों और दूसरी संस्थाओं से बेहिसाब धन लेना शामिल है। इसके अलावा बिना किसी व्यावसायिक साख के असुरक्षित लोन लेना, फर्जी बिल और चालान जारी करना, हवाला चैनलों के जरिए नकद राशि का इधर-उधर ट्रांजेक्शन भी इनमें शामिल हैं।
I-PAC ने बंगाल में सारे काम रोके, कर्मचारियों को 20 दिन की छुट्टी पर भेजा
इस बीच एक अन्य घटनाक्रम के तहत पश्चिम बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाली I-PAC ने बंगाल में अपने सारे काम रोक दिए हैं और अपने सभी कर्मचारियों को 20 दिन की छुट्टी पर भेज दिया है।
कर्मचारियों को अंदरूनी ईमेल के जरिए दी गई सूचना
कर्मचारियों को एक अंदरूनी ईमेल के जरिए इस बारे में बता दिया है। इस ईमेल में इस कुछ समय के लिए काम रोकने की मुख्य वजह कुछ खास कानूनी मजबूरियों को बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों को शनिवार आधी रात के आस-पास यह ईमेल मिला।
प्रबंधन 11 मई के बाद कर्मचारियों से दोबारा संपर्क करेगा
I-PAC मैनेजमेंट की तरफ से जारी निर्देश में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में अभी काम कर रहे सभी कर्मचारियों को तुरंत काम बंद करने और अगले 20 दिनों के लिए कुछ समय की छुट्टी पर जाने का निर्देश दिया जाता है। प्रबंधन 11 मई के बाद कर्मचारियों से दोबारा संपर्क करेगा, जिसके बाद हालात का जायजा लिया जाएगा और भविष्य की रणनीतियों या अगले कदमों पर चर्चा की जाएगी।
ईमेल में I-PAC मैनेजमेंट ने कहा – ‘हमने हमेशा कानून का सम्मान किया है, और हम पूरी कानूनी प्रक्रिया में अपना पूरा सहयोग दे रहे हैं। हमें पूरा भरोसा है कि सही समय पर हमें इंसाफ़ मिलेगा।’
बंगाल के राजनीतिक हलकों में बड़ी हलचल
इस घटनाक्रम से फिलहाल राज्य के राजनीतिक हलकों में बड़ी हलचल मच गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कम्पनी का, जिसे तृणमूल कांग्रेस के चुनावी अभियानों, रणनीतिक योजना और चुनावी दांव-पेच के पीछे की मुख्य ताकतों में से एक माना जाता है, अचानक पीछे हट जाना राज्य की सत्ताधारी पार्टी को चुनावों की ठीक दहलीज पर ही बेहद मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।
राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होने हैं चुनाव
पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होने हैं और वोटों की गिनती 4 मई को होगी। सूत्रों के मुताबिक, I-PAC का यह अनोखा कदम हाल की राजनीतिक उठा-पटक और केंद्रीय जांच एजेंसियों के लगातार बढ़ते दबाव की वजह से उठाया गया है।
ED ने इसी वर्ष जनवरी में I-PAC के ठिकानों पर की थी छापेमारी
उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष जनवरी में ED ने I-PAC के कोलकाता स्थित दफ्तर और संगठन के प्रमुख सदस्यों में से एक, प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर अचानक तलाशी अभियान चलाया था। इन तलाशी अभियानों के दौरान, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं उस जगह पर पहुंच गई थीं, जहां तलाशी चल रही थी। आरोप लगे कि ED की छापेमारी जारी रहने के बावजूद, उस जगह से अहम दस्तावेज़ हटा दिए गए थे।
उस समय मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र में सत्ताधारी भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए और तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीतियों से जुड़ी अत्यंत गोपनीय और महत्वपूर्ण जानकारी ‘चुराने’ के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों को जान-बूझकर हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। इन तलाशी अभियानों की कानूनी वैधता अंततः सर्वोच्च न्यायालय का विषय बन गई, जहां यह मामला अब भी विचाराधीन है।
