नई दिल्ली, 23 जून। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अल नीनो को लेकर बड़ी चेतावनी देते मंगलवार को कहा कि सरकार ने 111 जिलों की पहचान की है, जहां फसल को सबसे ज्यादा नुकसान का खतरा है, क्योंकि अल नीनो (El Nino) के कारण मानसून में 43 प्रतिशत की कमी खरीफ की बुवाई को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि मानसून की कमजोर स्थिति दो जुलाई तक बने रहने की संभावना है, जिससे किसानों के पास खरीफ की फसल बोने के लिए बहुत कम समय बचेगा।
मानसून की बारिश में 43 प्रतिशत की कमी
शिवराज चौहान ने बताया कि 22 जून तक, खरीफ फसलों की बुवाई कुल बोए जाने वाले क्षेत्र के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से में हुई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में दर्ज एक करोड़ 17.9 लाख हेक्टेयर की तुलना में थोड़ा अधिक यानी एक करोड़ 19.9 लाख हेक्टेयर है। और सोयाबीन को छोड़कर ज्यादातर फसलें आगे चल रही हैं।
315 जिलों में दिखेगा कमजोर मानसून का असर
मानसून की प्रगति पर समीक्षा बैठक के बाद कृषि मंत्री ने पत्रकारों से कहा, ‘कुल मिलाकर, मानसून की बारिश में 43 प्रतिशत की कमी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि कमजोर मानसून दो जुलाई तक जारी रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।’
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— Office of Shivraj (@OfficeofSSC) June 23, 2026
मंत्रालय ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 315 जिलों की पहचान की है, जहां सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
111 जिलों को सबसे अधिक नुकसान
इनमें से 111 जिलों जिनमें महाराष्ट्र के 20 जिले शामिल हैं को ‘सबसे ज्यादा जोखिम वाले’ जिलों के तौर पर बांटा गया है, क्योंकि वहां सिंचाई की सुविधा 25 प्रतिशत से कम है। 25-50 प्रतिशत सिंचाई सुविधा वाले 76 जिले ‘मध्यम जोखिम’ वाली श्रेणी में आते हैं जबकि पर्याप्त बांध और सिंचाई बुनियादी ढांचे वाले 128 जिलों को ‘‘सबसे कम जोखिम’’ वाला माना गया है। मंत्रालय ने राज्य-वार आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं, जिनमें कम बारिश की स्थिति के अनुकूल वैकल्पिक फसलों की खेती करने की अपील की गई है।
आज नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में अल नीनो और कमजोर मानसून की संभावित परिस्थितियों को लेकर राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की।
किसानों को किसी भी परिस्थिति में कठिनाई न हो, इसके लिए केंद्र और राज्य… pic.twitter.com/7dAEa7Dgts
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) June 23, 2026
दलहन-तिलहन उगाने की सलाह
राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे कम पानी की जरूरत वाली दालों, तिलहनों और मोटे अनाजों को बढ़ावा दें और किसी एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय कम समय में तैयार होने वाली और जलवायु के अनुकूल बीजों की किस्मों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें। मंत्री ने कहा, ‘‘बारिश में कमी है। हमें किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने का सुझाव देने की जरूरत है। हम खेतों को खाली नहीं रहने देंगे।’’ उन्होंने कहा कि इस सत्र के लिए बीज और खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। जलाशयों में पानी का स्तर अभी पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है, हालांकि इसमें कमी आ रही है।
राज्यों से कहा गया है कि वे पानी का समझदारी से इस्तेमाल करें और सिंचाई की जरूरतों के लिए पानी बचाने के मकसद से वीबी-ग्राम जी (विकसित भारत–रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन ग्रामीण) कार्यक्रम के तहत तालाबों, नदियों, खेतों के तालाबों और चेक डैम की सफाई करें।
