FIFA World जीतने वाली स्पेन पर हुई करोड़ों की बारिश, अर्जेंटीना भी मालामाल; जानिए किस टीम को कितनी मिली इनामी राशि

न्यूयॉर्क , 20 जुलाई। न्यूयॉर्क के मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में स्पेन ने लियोनेल मेसी की अगुआई वाली अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इस जीत के साथ स्पेन ने न केवल फुटबॉल की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफी अपने नाम की, बल्कि फीफा इतिहास की सबसे बड़ी विजेता इनामी राशि भी हासिल कर ली। दूसरी ओर, मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना का लगातार दूसरा विश्व कप जीतने का सपना टूट गया, लेकिन उपविजेता बनने के बावजूद टीम को करोड़ों रुपये की पुरस्कार राशि मिली।

फीफा ने रखा था रिकॉर्ड 655 मिलियन डॉलर का प्राइज पूल

दिसंबर 2025 में फीफा अध्यक्ष गियानी इन्फेंटिनो की अध्यक्षता में हुई फीफा काउंसिल की बैठक में 2026 विश्व कप के लिए 655 मिलियन डॉलर का रिकॉर्ड प्राइज पूल मंजूर किया गया था। यह 2022 विश्व कप की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक था। 48 टीमों वाले विस्तारित टूर्नामेंट में सभी देशों को उनके प्रदर्शन के आधार पर इनामी राशि दी गई।

स्पेन और अर्जेंटीना को कितनी मिली प्राइज मनी?

  • चैंपियन स्पेन: 50 मिलियन डॉलर (करीब 481 करोड़ रुपये)
  • उपविजेता अर्जेंटीना: 33 मिलियन डॉलर (करीब 318 करोड़ रुपये)

स्पेन को मिली यह राशि पुरुष फीफा विश्व कप इतिहास में किसी भी विजेता टीम को मिलने वाली अब तक की सबसे बड़ी इनामी रकम है।

FIFA World Cup 2026 Prize Money List

स्थान इनामी राशि
🏆 चैंपियन (स्पेन) 50 मिलियन डॉलर
🥈 उपविजेता (अर्जेंटीना) 33 मिलियन डॉलर
🥉 तीसरा स्थान (इंग्लैंड) 29 मिलियन डॉलर
चौथा स्थान (फ्रांस) 27 मिलियन डॉलर
5वें से 8वें स्थान तक 19 मिलियन डॉलर
9वें से 16वें स्थान तक 15 मिलियन डॉलर
17वें से 32वें स्थान तक 11 मिलियन डॉलर
33वें से 48वें स्थान तक 9 मिलियन डॉलर

48 टीमों को मिला बढ़ी हुई प्राइज मनी का फायदा

2026 विश्व कप पहली बार 48 टीमों के विस्तारित प्रारूप में खेला गया। इसी वजह से फीफा ने प्राइज मनी में भी बड़ा इजाफा किया, जिससे नॉकआउट में पहुंचने वाली टीमों के साथ-साथ ग्रुप चरण में बाहर होने वाली टीमों को भी पहले की तुलना में अधिक इनामी राशि मिली। स्पेन जहां अपनी ऐतिहासिक विश्व कप जीत का जश्न मना रहा है, वहीं इस रिकॉर्ड प्राइज फंड ने टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले सभी 48 देशों को आर्थिक रूप से भी बड़ा लाभ पहुंचाया।

 

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