लखनऊ, 2 नवंबर। अयोध्या को सृष्टि की पहली नगरी और भगवान विष्णु के लोक साकेत की प्रतिच्छाया कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं और आर्ष ग्रंथों में वर्णित इस पौराणिक नगरी की भव्यता दीपोत्सव के दौरान देखते ही बनती है। दीपों की रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार, रामायण के प्रसंगों की झलक और सरयू की लहरों पर झिलमिलाते हजारों दीप अयोध्या को अलौकिक रूप प्रदान करते हैं। हर साल दीपावली से पहले आयोजित होने वाला अयोध्या का दीपोत्सव अब देश-दुनिया के आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
वर्ष 2017 में राम की पैड़ी पर 1.71 लाख दीप जलाकर शुरू हुई इस परंपरा ने हर साल नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इस बार सात नवंबर को अयोध्या में 30 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 35 हजार से अधिक स्वयंसेवक दीप सजाने और आयोजन को सफल बनाने में जुटेंगे। आइए जानते हैं अयोध्या के दीपोत्सव के प्रमुख आकर्षणों के बारे में।
श्रीराम के राज्याभिषेक से जीवंत होती है त्रेतायुग की स्मृति
अयोध्या दीपोत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण भगवान श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक होता है। मान्यता के अनुसार, रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन पर पूरी नगरी में उत्सव मनाया गया और उनका राज्याभिषेक हुआ। इसी प्रसंग को दीपोत्सव के दौरान जीवंत किया जाता है। सरयू तट पर पुष्पक विमान से श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के आगमन के बाद मुख्यमंत्री, संत-महात्मा और अन्य अतिथि उनकी अगवानी करते हैं। इसके बाद उन्हें रामकथा पार्क ले जाया जाता है। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संतों और धर्माचार्यों की मौजूदगी में भगवान श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक किया जाता है। आरती और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
पुष्पक विमान से श्रीराम के आगमन का अद्भुत दृश्य
रामायण में वर्णन मिलता है कि लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे थे। दीपोत्सव में इस प्रसंग को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाता है। इसके लिए हेलीकॉप्टर को पुष्पक विमान की तरह सजाया जाता है। इसमें भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वरूप सवार होकर सरयू तट पर बनाए गए हेलीपैड पर उतरते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित संत-महात्मा और अन्य अतिथि उनका स्वागत करते हैं। इसके बाद विशेष रथ के माध्यम से उन्हें रामकथा पार्क ले जाया जाता है। इस दौरान अतिथियों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में राम के अयोध्या आगमन का दृश्य त्रेतायुग की याद दिलाता है।
दीपों की लड़ियों से स्वर्ग जैसा दिखता है सरयू तट
दीपोत्सव की सबसे मनमोहक तस्वीर सरयू नदी के घाटों पर दिखाई देती है। घाटों पर कतारबद्ध तरीके से सजाए गए लाखों दीप जब एक साथ प्रज्वलित होते हैं, तो पूरा सरयू तट रोशनी से नहा उठता है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो सरयू का श्रृंगार दीपों से किया गया हो। नदी की लहरों पर पड़ती दीपों की झिलमिलाती परछाइयां इस दृश्य को और भी आकर्षक बना देती हैं। श्रद्धालु इस अलौकिक नजारे को अपने कैमरों में कैद करने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। दीपों की रोशनी में रामनगरी का स्वरूप देखते ही बनता है।
आसमान में दिखाई देते हैं रामायण के प्रसंग
दीपोत्सव के दौरान अयोध्या का आसमान भी आकर्षण का केंद्र बन जाता है। लेजर शो के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को आकाश में जीवंत किया जाता है। कभी भगवान श्रीराम और माता सीता की झलक दिखाई देती है, तो कभी राम-रावण युद्ध और हनुमान जी के संजीवनी बूटी लाने का दृश्य लोगों को रोमांचित कर देता है। रंगीन रोशनी और आधुनिक तकनीक के जरिए प्रस्तुत किए जाने वाले ये दृश्य श्रद्धालुओं को रामायण की कथा से जोड़ते हैं। कई किलोमीटर दूर से भी लोग इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए पहुंचते हैं।
सामूहिक सरयू आरती का अद्भुत नजारा
दीपोत्सव के दौरान मां सरयू की सामूहिक आरती भी विशेष आकर्षण होती है। सैकड़ों श्रद्धालु एक साथ दीप और आरती की थालियां लेकर मां सरयू की आराधना करते हैं। इस आयोजन में संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल होते हैं। एक साथ उठती आरती की लौ, घंटियों की गूंज और मां सरयू के जयकारे पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना देते हैं।
30 लाख से अधिक दीप जलाने का लक्ष्य, 35 हजार स्वयंसेवक जुटेंगे
इस बार सात नवंबर को अयोध्या में 30 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 35 हजार से अधिक स्वयंसेवकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरयू के घाटों पर दीप सजाने के लिए क्रमवार मार्किंग का काम शुरू हो चुका है। निर्धारित स्थानों पर दीप रखे जाएंगे और दीपोत्सव के दिन उनमें तेल डालकर गोधूलि बेला में एक साथ प्रज्वलित किया जाएगा। लाखों दीपों की एक साथ जलती लौ से रामनगरी एक बार फिर रोशनी के महासागर में तब्दील हो जाएगी।
हर साल अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ रही रामनगरी
अयोध्या का दीपोत्सव वर्ष 2017 से लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। दीपों की संख्या के मामले में हर साल पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने का प्रयास किया गया है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम भी दीपों की संख्या का सत्यापन करने के लिए आयोजन में मौजूद रहती है।
दीपोत्सव में बनाए गए प्रमुख रिकॉर्ड इस प्रकार हैं:
- 2018: 3.01 लाख दीप
- 2019: 4.04 लाख दीप
- 2020: 6.06 लाख दीप
- 2021: 9.41 लाख दीप
- 2022: 15.76 लाख दीप
- 2023: 22.23 लाख दीप
- 2024: 25.12 लाख दीप
- 2025: 26,11,101 दीप
वर्ष 2025 में सरयू के 55 घाटों पर 26 लाख 11 हजार 101 दीप प्रज्वलित किए गए थे। इस बार 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीप जलाने का लक्ष्य है। ऐसे में अयोध्या एक बार फिर अपने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की तैयारी में है।
सरयू तट ही नहीं, पूरी अयोध्या होती है रोशन
अब अयोध्या का दीपोत्सव केवल सरयू तट तक सीमित नहीं रह गया है। पूरी रामनगरी को रोशनी और सजावट से सजाया जाता है। अयोध्या और फैजाबाद के प्रमुख चौक-चौराहों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष सजावट की जाती है। इसके अलावा 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर भी दीप जलाए जाते हैं। नंदीग्राम भरतकुंड और मां कामाख्या धाम सहित कई तीर्थस्थलों पर दीपोत्सव की विशेष छटा देखने को मिलती है।
रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगाता है अयोध्या का आसमान
दीपोत्सव की रात अयोध्या का आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से रोशन हो उठता है। सरयू नदी के ऊपर आसमान में बिखरती रंगीन रोशनी और घाटों पर जलते लाखों दीप मिलकर ऐसा नजारा पेश करते हैं, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। आयोजन में निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप आतिशबाजी की व्यवस्था आकर्षण का हिस्सा रहती है।
दीपावली की रात भी होता है लेजर शो
दीपोत्सव के दिन आयोजित होने वाला लेजर शो भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालुओं की मांग को देखते हुए दीपोत्सव के अगले दिन यानी दीपावली की रात भी लेजर शो आयोजित किया जाता है। रामायण के प्रसंगों को रोशनी और आधुनिक तकनीक के जरिए प्रस्तुत किया जाता है। इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस तरह अयोध्या का दीपोत्सव केवल दीप जलाने का आयोजन नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की स्मृति को उत्सव के रूप में जीवंत करने का माध्यम बन चुका है। सरयू के घाटों से लेकर मंदिरों और गलियों तक जगमगाती रोशनी रामनगरी को एक अलग ही स्वरूप देती है। लाखों दीपों की लौ में श्रद्धा, परंपरा और संस्कृति का संगम दिखाई देता है।


